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उत्तराखंड: आयरन लेडी के नाम से विख्यात इंदिरा हृदयेश की पुण्यतिथि आज! जानिए उनके राजनैतिक सफर की दास्ताँ

Uttarakhand: Today is the death anniversary of Indira Hridayesh, known as Iron Lady! Know the story of his political journey

हल्द्वानी। आज नगर कांग्रेस कमेटी, नैनीताल के अध्यक्ष अनुपम कबड्वाल के नेतृत्व में उत्तराखंड की आयरन लेडी पूर्व कैबिनेट मंत्री पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा हृदयेश की दूसरी पुण्यतिथि पर नगर के कांग्रेस जनों द्वारा उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर कांग्रेस जनों द्वारा उनको नमन करते हुए उनके विकास कार्यों को याद किया गया। नगर अध्यक्ष अनुपम कबड्वाल ने प्रदेश सरकार से मांग करी की आयरन लेडी के अधूरे सपने रिंग रोड, आईएसबीटी आदि अधूरे कार्यों को कुमाऊं की जनता के व्यापक हित में शीघ्र पूरा करें।


उनके राजनैतिक सफर पर एक नज़र

स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश की आज पुण्यतिथि है। पुण्यतिथि के मौके पर राजनीति के कई दिग्गज इंदिरा को श्रद्धा सुमन अर्पित करने पहुंच रहे हैं। 13 जून 2021 को दिल्ली में 80 वर्ष की उम्र में इंदिरा हृदयेश का निधन हो गया था। उत्तराखंड की राजनीति में इंदिरा हृदयेश की बड़ी भूमिका रही थी। इसीलिए इंदिरा हृदयेश को उत्तराखंड की आयरन लेडी कहा जाता था। इंदिरा ह्रदयेश का जन्म 7 अप्रैल, 1941 को अयोध्या में हुआ था। उन्होंने हिंदी और राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल करने के साथ बीएड और पीएचडी की डिग्री भी हासिल की थी। इंदिरा हृदयेश ने पिछले चार दशक से यूपी से लेकर उत्तराखंड की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाई थी। वे एक कुशल प्रशासक, वरिष्ठ राजनीतिज्ञ व संसदीय ज्ञान की जानकार थीं।

7 अप्रैल, 1941 में जन्मी इंदिरा हृदयेश उत्तराखंड की राजनीति में आयरन लेडी के नाम से जानी जाती थीं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत उत्तर प्रदेश से की थी। उनकी राजनीतिक पारी उत्तराखंड के नेता प्रतिपक्ष के रूप में समाप्त हुई थी। इंदिरा हृदयेश 33 साल की उम्र में 1974 में पहली बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य बनीं। इंदिरा हृदयेश की काबिलियत ही थी कि उनकी गिनती कांग्रेस के बड़े नेताओं में की जाती थी। उसके बाद फिर से 1986, 1992 और 1998 में भी वो उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्य चुनी गईं। 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड अलग राज्य बनने पर अंतरिम सरकार बनी तो इंदिरा हृदयेश विपक्ष की नेता चुनी गईं। मार्च 2002 में उत्तराखंड में पहली विधानसभा के लिए चुनाव हुए. इंदिरा हृदयेश हल्द्वानी से विधायक चुनी गईं। एनडी तिवारी जब मुख्यमंत्री बने, तब इंदिरा हृदयेश ने मंत्री रहते हुए पीएडब्ल्यूडी, फाइनेंस, संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग को संभाला। इंदिरा हृदयेश ने उत्तराखंड की राजनीति को कई नए मुकाम दिए। एनडी तिवारी से लेकर हरीश रावत सरकार में इंदिरा हृदयेश ने मंत्री रहते हुए कई अहम मंत्रालयों को संभाला। उन्होंने प्रदेश में काफी कुछ विकास के काम किए। खासकर कुमाऊं मंडल में उनको मददगार नेता माना जाता रहा। इंदिरा हृदयेश के 3 पुत्र हैं।  उनकी राजनीतिक विरासत को उनके पुत्र सुमित हृदयेश संभाल रहे हैं। सुमित हृदयेश वर्तमान में हल्द्वानी के विधायक हैं।