उत्तराखण्डः कुछ लोग केवल उपचार नहीं करते, जीवन भी लौटा देते हैं! नंदा देवी राजजात यात्रा में बिगड़ी तबीयत, अनजान लोगों और चिकित्सकों ने संभाला, राजेश पंत ने देवभूमि की मानवता को किया नमन
चमोली। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध नंदा देवी राजजात यात्रा आस्था, संस्कृति और लोकपरंपराओं के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं की भी प्रतीक है। हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों से गुजरने वाली इस पवित्र यात्रा में शामिल हुए राजेश पंत के लिए यह अनुभव जीवनभर याद रहने वाला बन गया। यात्रा के दौरान चमोली की दुर्गम पहाड़ियों में अचानक उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। ऐसे कठिन समय में स्थानीय लोगों ने बिना किसी परिचय के उनकी मदद की और उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग किया। इसके बाद हिमालयन अस्पताल, जौलीग्रांट में मिले उपचार ने उन्हें स्वस्थ होकर जीवन की ओर लौटने का अवसर दिया। इस अनुभव को साझा करते हुए राजेश पंत ने स्थानीय लोगों, चिकित्सकों और अस्पताल के चिकित्सा कर्मियों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। राजेश पंत ने अपने भावुक संदेश में कहा कि नंदा देवी राजजात केवल पहाड़ों की कठिन पगडंडियों पर चलने वाली धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह हिमालय की आस्था, संस्कृति, लोकविश्वास और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी महान परंपरा है। इस यात्रा के दौरान उन्हें हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता के साथ यहां के लोगों के हृदय में बसी मानवता को करीब से जानने का अवसर मिला। राजेश पंत के अनुसार, जब चमोली की दुर्गम पहाड़ियों में उनकी तबीयत बिगड़ी, तब वहां मौजूद लोगों ने जिस आत्मीयता से उनकी सहायता की, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। जिन लोगों से उनका कोई परिचय नहीं था, वे संकट के समय उनके अपने बनकर खड़े हो गए। किसी ने उन्हें संभाला, किसी ने रास्ता दिखाया, तो किसी ने अस्पताल पहुंचाने और परिजनों को सूचना देने में सहयोग किया। उन्होंने कहा कि गढ़वाल की यही पहचान है, सरलता, अपनत्व और अतिथि को अपना मानने की परंपरा। यदि स्थानीय लोगों ने समय रहते उनकी सुध नहीं ली होती और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में तत्परता नहीं दिखाई होती, तो परिस्थितियां बेहद गंभीर हो सकती थीं।
उन्होंने मदद करने वाले सभी लोगों को अपने जीवन का रक्षक बताते हुए कहा कि उनका यह उपकार वह जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। तबीयत बिगड़ने के बाद राजेश पंत को देहरादून के जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि अस्पताल के चिकित्सकों और पूरे चिकित्सा दल ने तत्परता, संवेदनशीलता और कुशलता के साथ उनका उपचार किया। उनके मुताबिक, उन्हें उचित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिली और उपचार का खर्च भी वाजिब रहा। राजेश पंत ने अस्पताल के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. अनुराग रावत और अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी सत्यपाल का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन समय में इन लोगों ने उनका साथ दिया। बीमारी और असहायता के दौर में जिस संवेदनशीलता के साथ उनकी मदद की गई, वह उनके लिए सदैव स्मरणीय रहेगी। राजेश पंत ने कहा कि नंदा देवी राजजात यात्रा ने उन्हें केवल हिमालय के दर्शन नहीं कराए, बल्कि यहां के लोगों के भीतर बसे अपनत्व और मानवीयता को भी समझने का अवसर दिया। मां नंदा को मायके से ससुराल की ओर विदा करने वाली इस लोकयात्रा में वह स्वयं भी जीवन की एक कठिन परिस्थिति से गुजरकर लौटे हैं। उनके लिए संकट के समय मदद करने वाले लोग अब अनजान नहीं, बल्कि जीवनभर याद रहने वाले अपने बन गए हैं। उन्होंने गढ़वाल की धरती, यहां की सरल और अतिथि-सत्कार करने वाली जनता तथा नंदा देवी की पावन परंपरा को नमन किया। राजेश पंत ने कहा कि कभी-कभी जीवन में ऐसे लोग मिलते हैं, जो केवल उपचार नहीं करते, बल्कि दोबारा जीने का भरोसा भी लौटाते हैं। चमोली के स्थानीय लोगों और हिमालयन अस्पताल के चिकित्सकों से मिला सहयोग उनके लिए ऐसा ही अनुभव रहा, जिसके प्रति वह सदैव कृतज्ञ रहेंगे।