बड़ी खबरः गुजरात में UCC को राष्ट्रपति की मंजूरी! उत्तराखंड के बाद देश का दूसरा राज्य बना गुजरात, नियम जारी होते ही पूरे प्रदेश में लागू होगा समान नागरिक संहिता
नई दिल्ली। गुजरात से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, यहां समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकार द्वारा नियमों की घोषणा किए जाने के बाद यह पूरे राज्य में लागू हो जाएगा। इसके साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का ऐसा दूसरा राज्य बन गया है, जहां यूसीसी के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली है। बता दें, कानून की नजर में सब एक समान होते हैं। शादी, तलाक,एडॉप्शन, उत्तराधिकार, विरासत लेकिन सबसे बढ़कर लैंगिक समानता वो कारण है, जिस वजह से यूनिफार्म सिविल कोड की आवश्यकता महसूस की जाती रही है। समान नागरिक संहिता का मतलब है विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे जैसे विषयों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम। भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। यूसीसी बिल को गुजरात विधानसभा ने मार्च 2026 में पारित किया था। बता दें कि यह विधेयक विवाह, तलाक के अलावा उत्तराधिकार व लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों के लिए बिना किसी धर्म की परवाह किए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रावधान करता है। यूसीसी के लागू हो जाने के बाद विवाह और उससे जुड़े कानूनी मामलों में कई अहम बदलाव होंगे। इसके मुताबिक इसमें विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किए जाने का प्रावधान है।
इसी प्रकार लिव-इन रिलेशनशिप को भी निर्धारित मानक के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसका मकसद विवाह, उत्तराधिकार, तलाक और संपत्ति से जुड़े मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करना है। इतना ही नहीं यूसीसी में उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकारों को लेकर बेटों और बेटियों के बीच में समानता का प्रावधान किया गया है। यानी किसी भी पैतृक और अन्य उत्तराधिकार संबंधी मामलों में बेटे के समान ही बेटियों को भी अधिकार प्राप्त होगा। वहीं बिना वसीयत के किसी व्यक्ति की मौत हो जाने पर उसके जीवनसाथी, बच्चों के अलावा माता-पिता के अधिकार भी कानून के तहत तय किए गए हैं। इसके अलावा सरोगेसी और गोद लेने से जुड़े बच्चों को भी कानूनी अधिकारों के मामले में समान सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है। लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा लेने वाले बच्चों के अधिकारों को भी कानून के तहत संरक्षित किया गया है। गुजरात यूसीसी में एकविवाह का नियम लागू किया गया है। इसके अंतर्गत पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी करने पर प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा विवाह और तलाक से जुड़े मामलों के लिए भी एक समान कानूनी प्रक्रिया तय की गई है। यूसीसी की प्रमुख व्यवस्थाओं में लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन भी शामिल है। गुजरात यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को इसके कुछ प्रावधानों में छूट दी गई है। क्योंकि इसके पीछे आदिवासी समुदायों की पारंपरिक सामाजिक और वैवाहिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखना बताया गया है।