मेरठ का चर्चित सौरभ हत्याकांडः जिला जज की अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया! सजा पर फैसला सुरक्षित, जज के सवाल पर बोली मुस्कान- हमने जो करना था कर दिया...
मेरठ। मेरठ के बहुचर्चित सौरभ हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने बुधवार को सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया। दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाया, जबकि सजा के बिंदु पर निर्णय सुरक्षित रखा गया है। अदालत परिसर में फैसले को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जिला कारागार में बंद दोनों आरोपियों को सुरक्षा कारणों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। अभियोजन के अनुसार, यह मामला सौरभ की हत्या और उसके शव को छिपाने से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, सौरभ का शव एक नीले प्लास्टिक के ड्रम से बरामद किया गया था, जिसे सीमेंट के घोल से सील किया गया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में मामले को परिस्थिति जन्य, चिकित्सकीय और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर साबित करने का प्रयास किया। वहीं बचाव पक्ष ने मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने और संपत्ति विवाद के कारण आरोपियों को फंसाए जाने की दलील दी। अभियोजन के मुताबिक, इंद्रानगर निवासी सौरभ लंदन में नौकरी करता था और 24 फरवरी 2025 को मेरठ स्थित अपने घर वापस आया था। अभियोजन का आरोप है कि सौरभ के घर लौटने के बाद उसकी पत्नी मुस्कान और साहिल के कथित संबंधों में वह बाधा बन रहा था। इसी को हत्या की साजिश की वजह बताया गया। अभियोजन के अनुसार, 3 मार्च 2025 की रात सौरभ के खाने में नशीली दवा मिलाई गई। उसके बेसुध होने के बाद साहिल को घर बुलाए जाने का आरोप है। इसके बाद दोनों ने उस पर हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस जांच में सामने आए घटनाक्रम के आधार पर अभियोजन ने इसे पूर्व नियोजित हत्या बताया। पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद शव को छिपाने के लिए आरोपियों ने उसे ठिकाने लगाने की योजना बनाई। जांच के मुताबिक, एक बड़ा नीला प्लास्टिक ड्रम, सीमेंट, बालू और डस्ट खरीदी गई। अभियोजन का कहना है कि शव को पॉलीथीन में लपेटकर ड्रम में रखा गया और सीमेंट के घोल से उसे सील कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, इसी ड्रम से शव बरामद हुआ था। जांच के दौरान आरोपियों के शिमला और मनाली जाने की बात भी सामने आई थी। अभियोजन ने इस यात्रा और अन्य परिस्थितियों को भी मामले की कड़ियों से जोड़ते हुए अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने के कारण अभियोजन की पूरी कहानी परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर टिकी रही। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क भी दिया गया कि संपत्ति विवाद के कारण आरोपियों को इस मामले में फंसाया गया। इसके जवाब में अभियोजन ने पुलिस की विवेचना, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, चिकित्सकीय रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा। जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों ने मामले से संबंधित साक्ष्यों के बारे में गवाही दी। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. दिनेश सिंह चौहान का बयान भी अभियोजन साक्ष्य का हिस्सा रहा। अभियोजन के अनुसार, पोस्टमार्टम में सौरभ की मौत अत्यधिक रक्तस्राव और शॉक से होने की बात सामने आई थी। अभियोजन ने चिकित्सकीय साक्ष्य को मामले में प्रस्तुत अन्य परिस्थितियों के साथ जोड़कर अपनी दलील रखी। सौरभ के भाई की तहरीर पर 18 मार्च 2025 को मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया। पुलिस ने जांच के दौरान घर से नीले ड्रम में सीमेंट से जमा हुआ शव बरामद किए जाने की बात कही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन जिला जज ने मुकदमे की सुनवाई प्रतिदिन कराने के निर्देश दिए थे। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। दोनों पक्षों की ओर से अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने बुधवार को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।
करीब 125 तारीखों के बाद आया फैसला
डीजीसी कृष्ण कुमार चौबे के अनुसार, मुकदमे में करीब 125 तारीखें लगीं। लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पुलिस अधिकारियोंए चिकित्सकों और अन्य गवाहों के बयान अदालत के सामने रखे। मामले में उपलब्ध दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर भी बहस हुई। बचाव पक्ष ने जहां प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने और आरोपियों को फंसाए जाने की दलील दीए वहीं अभियोजन ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी कड़ी अदालत के सामने रखी। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने बुधवार को दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।
फैसले के वक्त कोर्ट में हुई वीसी से पेशी
फैसले के दिन शाम करीब साढ़े चार बजे जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा के अदालत कक्ष में पहुंचने के बाद जिला कारागार से मुस्कान और साहिल की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी कराई गई। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दोनों को जेल से सीधे वीसी के माध्यम से अदालत से जोड़ा गया। अदालत की कार्यवाही के दौरान जज ने मुस्कान से पूछा कि फैसले का दिन है, क्या लग रहा है। इस पर मुस्कान ने जवाब दिया, हमने जो करना था कर दिया। इसके बाद सवाल किए जाने पर उसने कहा कि उसे कुछ नहीं बोलना है। अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा के बिंदु पर फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने अपराध के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव का भी उल्लेख किया।