उत्तराखण्डः हरिद्वार में गंगा किनारे अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त! मातृ सदन की जनहित याचिका पर सुनवाई, मामला फिर से नॉमिनेट बेंच को भेजा गया

Uttarakhand: The High Court takes a tough stand on illegal mining along the Ganges River in Haridwar! A public interest petition filed by Matri Sadan is being heard, and the matter has been referred

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार में रायवाला से भोगपुर व कुम्भ मेला क्षेत्र में गंगा नदी के किनारे हो रहे अवैध खनन के खिलाफ मातृ सदन हरिद्वार की जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ती सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने मामले की सुनवाई हेतु पूर्व में निर्धारित पीठ न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी व न्यायमूर्ती पंकज पुरोहित की खण्डपीठ को सुनने के लिए भेज दिया है। अब मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होगी। पूर्व में न्यायमूर्ति मैठाणी की पीठ ने पूर्व के आदेशों का अनुपालन नही करने पर नाराजगी व्यक्त की थी। कोर्ट ने कहा था कि पूर्व के आदेशों का अनुपालन न करना और स्टोन क्रेशरों का संचालन करना कानून का उलंघन है। पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने हरिद्वार में संचालित 48 स्टोन क्रेशरों को तत्काल बंद करने व उनकी बिजली पानी के कनेक्शन काटने के आदेश जिला अधिकारी हरिद्वार व एसएसपी हरिद्वार को दीए दिये थे। साथ में कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को भी कहा था। लेकिन आज मामला नॉमिनेट बेंच में लिस्ट न होकर मुख्य न्यायाधीश की बेंच में लिस्ट हुआ। जिसपर सुनवाई के बाद मुख्य न्यायधीश की कोर्ट ने मामले को नॉमिनेट बैंच को सुनवाई हेतु भेज दिया है। क्योंकि इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मैठाणी व पुरोहित की बेंच कर रही है। मामले के अनुसार हरिद्वार मातृ सदन ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि हरिद्वार में रायवाला से भोगपुर के बीच गंगा नदी में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है जिससे गंगा नदी के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। गंगा नदी में खनन करने वाले नेशनल मिशन क्लीन गंगा को पलीता लगा रहे हैं। जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की है कि गंगा नदी में हो रहे अवैध खनन पर रोक लगाई जाए ताकि गंगा नदी के अस्तित्व को बचाया जा सके। अब खनन कुम्भ क्षेत्र में भी किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि केंद्र सरकार ने गंगा नदी को बचाने के लिए एनएमसीजी बोर्ड गठित किया है। जिसका मुख्य उद्देश्य गंगा को साफ करना व उसके अस्तित्व को बचाए रखना है। एनएमसीजी द्वारा राज्य सरकार को बार बार आदेश दिए गए कि यहां खनन कार्य नहीं किया जाए। उसके बाद में सरकार ने यहां खनन कार्य करवाया जा रहा है। यूएन ने भी भारत सरकार को निर्देश दिए थे कि गंगा को बचाने के लिए क्या क्या कदम उठाए जा रहे। उसके बाद भी सरकार द्वारा गंगा के अस्तित्व को समाप्त किया जा रहा है।