मिडिल ईस्ट में जंग के साये से उत्तराखंड में चिंता, ईरान में मंगलौर के लोगों के फंसे होने की सूचना
देहरादून। मिडिल ईस्ट में तेजी से बिगड़ते हालात का असर हजारों किलोमीटर दूर उत्तराखंड तक महसूस किया जा रहा है। ईरान पर संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हमलों के बाद क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है। लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच वहां रह रहे भारतीय नागरिकों और विशेषकर उत्तराखंड के प्रवासियों के परिवारों में गहरी चिंता व्याप्त है।
बताया जा रहा है कि हालिया हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने की खबरों ने तनाव को और बढ़ा दिया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। बहरीन, यूएई, ओमान, कतर और सऊदी अरब सहित कई देशों में धमाकों और जवाबी हमलों की खबरें आ रही हैं। मिडिल ईस्ट के देशों संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, सऊदी अरब, ओमान और ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हैं। इनमें उत्तराखंड के हजारों लोग भी शामिल हैं। प्रदेश में रह रहे उनके परिजन लगातार फोन और सोशल मीडिया के जरिए हालचाल ले रहे हैं। देहरादून के मोहकमपुर माजरी निवासी कैलाश बिष्ट इस समय ओमान के दुकुम शहर में एक शिपिंग कंपनी में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि उनके आवास से करीब एक किलोमीटर दूरी पर ड्रोन धमाके हुए। ओमान ड्राइडॉक कंपनी परिसर के पास हुए हमले के बाद स्थानीय प्रशासन ने एडवाइजरी जारी की। कैलाश के अनुसार, “स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और काम पर लौटने की अनुमति दे दी गई है।”
ओमान सरकार ने नागरिकों और प्रवासियों से अपील की है कि वे सैन्य गतिविधियों से जुड़ी तस्वीरें या वीडियो साझा न करें और अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें। इसी तरह यूएई में भी एडवाइजरी जारी कर लोगों को फर्जी कॉल और ऑनलाइन फ्रॉड से सावधान रहने की चेतावनी दी गई है। दुबई में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडी गिरीश पंत ने बताया कि वहां करीब 40 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें लगभग 8 हजार उत्तराखंडी हैं। सरकार ने लोगों को जहां हैं वहीं रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। दिल्ली में उत्तराखंड सरकार के स्थानीय आयुक्त अजय मिश्रा ने बताया कि भारत सरकार ने मिडिल ईस्ट स्थित भारतीय दूतावासों के संपर्क में रहने और भारतीय नागरिकों का डेटा एकत्र करने की एडवाइजरी जारी की है। एक ऑनलाइन लिंक के माध्यम से नागरिक अपनी जानकारी दर्ज करा सकते हैं, ताकि आपात स्थिति में सीधे संपर्क किया जा सके। उत्तराखंड सरकार ने भी सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मिडिल ईस्ट में रह रहे प्रदेशवासियों का विवरण तैयार किया जाए। स्थानीय पुलिस और इंटेलिजेंस को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इधर मंगलौर के विधायक काजी निजामुद्दीन ने राज्य सरकार और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जानकारी दी है कि ईरान में मंगलौर के कुछ नागरिक फंसे हुए हैं। उन्होंने उनकी सुरक्षित वापसी के लिए केंद्र और राज्य सरकार से समन्वित प्रयास करने की मांग की है। रामनगर निवासी नितिन अग्रवाल अपने परिवार के साथ दुबई में फंसे हुए हैं। ईरान के जवाबी हमलों के बाद हवाई सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे वे वापस नहीं लौट पा रहे हैं। उन्होंने परिवार को सुरक्षित बताया है, लेकिन उड़ानें बहाल होने तक इंतजार करना पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में गूंज रहे धमाकों की आवाज भले ही दूर हो, लेकिन उसकी चिंता उत्तराखंड के घर-घर में महसूस की जा रही है। प्रदेश के सैकड़ों परिवार अपने परिजनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। फिलहाल भारत सरकार और संबंधित देशों की सरकारें हालात पर नजर बनाए हुए हैं। प्रवासी भारतीयों से अपील की गई है कि वे संयम बरतें, अफवाहों से दूर रहें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।