उत्तराखंड में डिजिटल क्रांति से होगी जनगणना: 30 हजार मानचित्रों और मोबाइल ऐप के जरिए तैयार होगी आबादी की सटीक तस्वीर

Census will be conducted through digital revolution in Uttarakhand: Accurate picture of population will be prepared through 30 thousand maps and mobile app.

देहरादून। उत्तराखंड में लंबे इंतजार के बाद अब जनगणना की प्रक्रिया एक नए और आधुनिक स्वरूप में शुरू होने जा रही है। साल 2011 के बाद, लगभग 16 वर्षों के अंतराल पर होने वाली यह जनगणना पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी। इस बार न केवल जनसंख्या की गिनती होगी, बल्कि राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का एक ऐसा डेटा बैंक तैयार होगा, जो आने वाले दशकों के लिए विकास की योजनाओं का आधार बनेगा। इस बार की जनगणना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू तकनीकी इस्तेमाल है। मकान सूचीकरण (House Listing) के पहले चरण के लिए निदेशालय ने 30 हजार डिजिटल मानचित्र तैयार किए हैं। ये मानचित्र जनगणना की रीढ़ साबित होंगे, जिनके आधार पर हर मकान का भौगोलिक स्थान, उसकी संरचना और उपयोग का सटीक ब्योरा दर्ज किया जाएगा। राज्य सरकार और जनगणना निदेशालय इस विशाल अभियान के लिए करीब 34 हजार कर्मियों को तैनात करने जा रहा है। ये कर्मचारी अब पारंपरिक कागज-कलम के बजाय मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे। डिजिटल एंट्री होने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों में मानवीय त्रुटि की संभावना भी नगण्य हो जाएगी।

उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने कार्ययोजना में लचीलापन रखा है। राज्य के ऊंचाई वाले 131 गांवों और प्रमुख तीर्थस्थलों जैसे बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में जनगणना का कार्य अक्टूबर से नवंबर के बीच ही संपन्न कर लिया जाएगा। यह निर्णय सर्दियों में होने वाली भारी बर्फबारी और रास्तों के बंद होने की आशंका को देखते हुए लिया गया है। वहीं, मैदानी और कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यह अभियान देशभर के साथ 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच चलाया जाएगा। चूंकि पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, इसलिए 16 साल के इस लंबे अंतराल के बाद आने वाले आंकड़े राज्य के लिए बेहद अहम होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों के जरिए यह स्पष्ट हो सकेगा कि उत्तराखंड में शहरीकरण, साक्षरता और रोजगार के पैटर्न में कितना बदलाव आया है। इन्ही सटीक आंकड़ों के आधार पर भविष्य में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए बजट और नीतियां तैयार की जाएंगी।