उत्तराखंड:अब हर जिले में बनेगा विद्युत/गैस शवदाह गृह!पर्यावरण संरक्षण और अधजले शवो को छोड़ देने की समस्या को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने दिए निर्देश
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य के प्रत्येक जिले में शवदाहगृह बनाए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिये है कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी नगर पालिका परिक्षेत्रों में 6 माह के भीतर एक विद्युत या गैस शवदाह गृह स्थापित करे और इसकी प्रगति रिपोर्ट हर माह कोर्ट में पेश करें।
आपकों बता दे ज्वालापुर हरिद्वार निवास ईश्वर चन्द्र वर्मा ने जनहीत याचिका दायर कर कहा है कि कोरोना के समय हरिद्वार में शवों का दाह संस्कार करने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नही हो पा रही है। जिसकी वजह से श्मशान घाटों में शवों को अधजलाकर कर छोड़ दिया जाता है। हरिद्वार में एक विद्युत शवदाह गृह लगाया गया था जिसका संचालन अभी तक राज्य सरकार ने नही किया। दाह संस्कार सेवा समिति के कार्यकर्ता दुर्गेश पंजवानी का यह भी कहना है कि लकड़ी से दाह संस्कार करने में 2500 से 3000 हजार रुपये का खर्चा आता है। कभी लकड़ियां नही मिलने पर लोग शव को नदी में ऐसे ही बहा देते है जिसकी वजह से पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। अगर विधुत शवदाह गृह संचालित किया जाता है तो इसमे समय के साथ पैसों की भी बचत होगी। और नदियों के साथ ही पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की है कि प्रदेश के कम से कम सभी नगरपालिकाओं के परिक्षेत्र में एक विद्युत शवदाह गृह बनाया जाय।