उत्तराखंड में 1300 से ज्यादा रिटायर्ड कर्मचारी ले रहे दोहरी पेंशन का लाभ, घर-घर जाकर होगी जांच,अब होगा बड़ा एक्शन

In Uttarakhand, more than 1300 retired employees are receiving double pensions; door-to-door verification will be conducted, and major action will be taken.

देहरादून। उत्तराखंड में दोहरी पेंशन लेने वाले रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों का बड़ा मामला सामने आया है। राज्य में 1300 से अधिक ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारी पाए गए हैं, जो एक ओर अपने विभाग से रिटायरमेंट पेंशन ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समाज कल्याण विभाग की वृद्धावस्था या विधवा पेंशन योजनाओं का भी लाभ उठा रहे हैं। इस गंभीर अनियमितता के सामने आने के बाद समाज कल्याण विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्यभर में जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। समाज कल्याण निदेशक के निर्देश पर सभी जिलों में जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। देहरादून जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर कल्याण ने बताया कि जिले में दोहरी पेंशन के कुल 126 मामले सामने आए हैं। इनमें से 93 वृद्धावस्था पेंशन और 33 विधवा पेंशन से जुड़े मामले हैं। उन्होंने बताया कि निदेशालय से प्राप्त सूची के आधार पर अब मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) कार्यालय के माध्यम से इन सभी पेंशन धारकों की घर-घर जाकर सत्यापन और पड़ताल की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

जिला समाज कल्याण अधिकारी ने स्पष्ट किया कि समाज कल्याण विभाग की पेंशन योजनाओं के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार लाभार्थी की राजस्व विभाग से प्रमाणित मासिक आय 4,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा पेंशन के लिए आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाता है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति पहले से नियमित पेंशन प्राप्त कर रहा है, तो उसका समाज कल्याण योजनाओं का लाभ लेना नियमों के खिलाफ है। पूरे प्रदेश में 1377 रिटायर्ड कर्मचारियों की जांच की जाएगी। समाज कल्याण विभाग ने वृद्धावस्था और विधवा पेंशन ले रहे इन सभी पेंशन धारकों की सूची जिलों को भेज दी है। समाज कल्याण निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सूची में शामिल 1377 में से 314 पेंशन धारकों की समाज कल्याण पेंशन पहले ही रोकी जा चुकी है, जबकि शेष 970 पेंशन धारकों की पेंशन पर रोक लगाते हुए जिलों को सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल, यह मामला तब उजागर हुआ जब महालेखाकार (लेखा परीक्षा) ने प्रदेश के पेंशन रिकॉर्ड की जांच की। जांच में सामने आया कि 1300 से अधिक रिटायर्ड कर्मचारी समाज कल्याण विभाग से भी पेंशन का लाभ ले रहे हैं। इसके बाद महालेखाकार ने मुख्य सचिव और वित्त सचिव को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। अब इस मामले में पहली बार बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू होने से सरकारी महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।