1 अप्रैल को ही क्यों बनाते हैं Fool? मजाक की शुरुआत कैसे हुई, जानिए पूरी कहानी एक क्लिक में
आज 1 अप्रैल है — यानी ‘अप्रैल फूल डे’!
यह वह दिन है जब लोग अपने दोस्तों, परिवार और सहकर्मियों के साथ हल्के-फुल्के मजाक करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर यह परंपरा शुरू कैसे हुई? और क्यों 1 अप्रैल को ही लोगों को “फूल” बनाया जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की रोचक कहानी।अप्रैल फूल डे की शुरुआत को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनमें सबसे प्रमुख जुड़ी है फ्रांस का कैलेंडर परिवर्तन 1582 से। 16वीं सदी में जब पोप ग्रेगरी तेरहवें ने ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू किया, तब नए साल की शुरुआत 1 अप्रैल से बदलकर 1 जनवरी कर दी गई।

कहा जाता है कि उस समय कई लोग इस बदलाव से अनजान थे या इसे स्वीकार नहीं कर पाए। ऐसे लोगों का मजाक उड़ाया जाने लगा और उन्हें ‘अप्रैल फूल’ कहा गया। धीरे-धीरे यह परंपरा अन्य देशों में भी फैल गई और आज यह एक वैश्विक प्रचलन बन चुकी है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इस दिन को अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। फ्रांस में ‘Poisson d’Avril’ के तहत लोगों की पीठ पर कागज की मछली चिपकाने की परंपरा है, वहीं ब्रिटेन में दोपहर तक ही मजाक करने का नियम माना जाता है। भारत में भी सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के साथ अप्रैल फूल डे का चलन तेजी से बढ़ा है।
इतिहास में कई बड़े प्रैंक भी इस दिन से जुड़े रहे हैं। 1957 में BBC द्वारा प्रसारित एक रिपोर्ट में स्विट्जरलैंड में पेड़ों पर स्पेगेटी उगने का दावा किया गया था, जिसे कई लोगों ने सच मान लिया था। इसी तरह 1996 में टाको बेल द्वारा अमेरिकी ‘लिबर्टी बेल’ खरीदने का दावा भी सुर्खियों में रहा।
अप्रैल फूल डे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि कई देशों में बड़े मजेदार अंदाज में मनाया जाता है:
ब्रिटेन: दोपहर तक ही मजाक करने की परंपरा
फ्रांस: लोगों की पीठ पर कागज की मछली चिपकाई जाती है (Poisson d’Avril)
अमेरिका: मीडिया और कंपनियां भी नकली खबरें या ऑफर जारी करती हैं
भारत: सोशल मीडिया पर प्रैंक और मजेदार पोस्ट का ट्रेंड
कुछ ऐतिहासिक और मजेदार प्रैंक
1957 में BBC ने एक नकली रिपोर्ट चलाई कि स्विट्जरलैंड में पेड़ों पर स्पेगेटी उग रही है — और कई लोग सच मान बैठे!
1996 में एक कंपनी ने टाको बेल ने दावा किया कि उसने अमेरिका की “लिबर्टी बेल” खरीद ली है
मजाक करें, लेकिन जिम्मेदारी से
अप्रैल फूल डे का असली मजा तभी है जब मजाक हल्का-फुल्का और सुरक्षित हो। ध्यान रखें:
किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे
अफवाह या फेक न्यूज न फैलाएं
खतरनाक प्रैंक से बचें