नैनीताल:सोशल मीडिया में केशव थलवाल द्वारा किए गए आरोप-प्रत्यारोप पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी-शिकायत का मंच अदालत है सोशल मीडिया नहीं!लिंक में पढ़ें पूरी खबर

Nainital: High Court's Significant Observation Regarding Allegations and Counter-Allegations Made by Keshav Thalwal on Social Media—The Proper Forum for Complaints is the Court, Not Social Media! Rea

सोशल मीडिया पोस्ट पर हाईकोर्ट सख्त, आपत्तिजनक वीडियो और मैसेज हटाने के निर्देश
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर किसी भी व्यक्ति की छवि खराब करने वाले पोस्ट, वीडियो और संदेशों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी प्रकार की शिकायत है, तो उसका समाधान कानून और संबंधित अधिकारियों के माध्यम से किया जाना चाहिए, न कि सोशल मीडिया पर अनर्गल प्रचार कर।
गढ़वाल क्षेत्र के केशव थलवाल और उनके सहयोगियों द्वारा सोशल मीडिया पर डाली जा रही पोस्टों के खिलाफ मयंक त्यागी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने सख्त निर्देश जारी किए। कोर्ट ने आदेश दिया कि सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर डाले गए वे सभी संदेश और वीडियो तत्काल हटाए जाएं, जो याचिकाकर्ता की छवि को धूमिल करते हैं। साथ ही पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए गए कि जांच अधिकारियों के माध्यम से इन आपत्तिजनक सामग्रियों को हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अदालत ने केशव थलवाल और उनके सहयोगियों को भविष्य में इंस्टाग्राम सहित किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनुचित व्हाट्सएप चैट, वीडियो या अन्य सामग्री अपलोड करने से भी प्रतिबंधित कर दिया है।
इसी मामले से जुड़ी दूसरी याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मानसिक स्थिति की जांच के लिए नियुक्त काउंसलर और मनोचिकित्सक की रिपोर्ट का संज्ञान लिया। रिपोर्ट में याचिकाकर्ता को चिकित्सकीय रूप से पूरी तरह स्वस्थ बताया गया है और मानसिक अस्वस्थता का कोई प्रमाण नहीं पाया गया।
सुनवाई के दौरान पुलिस हिरासत में ‘प्रतीक’ नामक युवक की कथित मौत और पुलिस प्रताड़ना से जुड़े पुराने मामले का भी उल्लेख किया गया। कोर्ट ने इस मामले का रिकॉर्ड तलब करते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की बात कही है। बताया गया कि इस मामले में तत्कालीन एसएचओ धर्मेंद्र रौतेला सहित छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। अदालत ने इस पूरे प्रकरण से संबंधित दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की माता श्रीमती उर्मिला देवी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुईं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 1 मई 2025 को दर्ज एफआईआर उनके वास्तविक बयानों के आधार पर नहीं थी। इसके बाद अदालत ने सरकारी वकील को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में वह मूल हस्तलिखित शिकायत पेश करें, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया था।
कोर्ट ने पुलिस जांच अधिकारियों को सभी एफआईआर की जांच बिना किसी पूर्वाग्रह के पारदर्शी तरीके से जारी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने कहा कि यदि केशव थलवाल को अपनी सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार का खतरा महसूस होता है, तो वह संबंधित एसएसपी को लिखित सूचना दे सकते हैं, जिसके बाद सुरक्षा का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मामले की अगली सुनवाई अब 5 जून 2026 को निर्धारित की गई है।