उत्तराखंड:जंतर-मंतर प्रदर्शन का समर्थन करना पड़ा भारी, पिथौरागढ़ के निलंबित कांस्टेबल को अनुशासनहीनता और आपराधिक पृष्ठभूमि के आधार पर किया बर्खास्त,
पिथौरागढ़। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का समर्थन करने पहुंचे उत्तराखंड पुलिस के निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह को आखिरकार पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। पिथौरागढ़ पुलिस ने विभागीय जांच पूरी होने के बाद यह कार्रवाई की है।
पिथौरागढ़ के एसपी के अनुसार, कांस्टेबल शेर सिंह पर पुलिस सेवा के अनुशासन, सत्यनिष्ठा और आचरण संबंधी नियमों का गंभीर उल्लंघन करने के आरोप सिद्ध हुए हैं। विभाग का कहना है कि उसने सार्वजनिक रूप से पुलिस विभाग पर आरोप लगाए और ऐसा आचरण किया जो सेवा नियमों के अनुरूप नहीं था। इसी आधार पर उसे पुलिस सेवा से हटाने का निर्णय लिया गया।
शेर सिंह मूल रूप से हरिद्वार का रहने वाला था और पिथौरागढ़ पुलिस लाइन में तैनात था। कुछ समय पहले वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में पहुंचा था, जहां उसने उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बयान दिए थे। उसने यह भी कहा था कि दिल्ली में लाठीचार्ज की घटना के बाद उसका मन इतना आहत हुआ कि उसने इस्तीफा देने का फैसला किया। उस दौरान उसके कुछ बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुए थे।
पुलिस के मुताबिक, शेर सिंह 28 जून से बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहा था। लगातार गैरहाजिर रहने के कारण उसे 20 जुलाई को निलंबित कर दिया गया था। विभागीय जांच के दौरान उसकी अनुपस्थिति, अनुशासनहीनता और अन्य तथ्यों को भी रिकॉर्ड में शामिल किया गया।
एसपी ने यह भी बताया कि शेर सिंह का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, वह कुख्यात अपराधी प्रवीण वाल्मीकि के साथ गतिविधियों में संलिप्त रहा है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विभागीय कार्रवाई पूरी की गई और उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
पुलिस का कहना है कि उत्तराखंड पुलिस में अनुशासन सर्वोपरि है और सेवा नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।