Oct 04, 2026 Login

सीईसी ज्ञानेश कुमार पर घिरी कानूनी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई; निलंबन से लेकर एसआईआर के 14 फैसलों को रद्द करने की मांग

CEC Gyanesh Kumar faces legal challenge; Supreme Court hearing tomorrow; demands range from his suspension to the quashing of 14 SIR decisions.

नई दिल्ली। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और निर्वाचन प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर जारी भारी राजनीतिक घमासान के बीच देश की सर्वोच्च अदालत से एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट में आज, सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल दो रिट याचिकाओं पर सुनवाई होने जा रही है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई करेगी।

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसलों और आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर दायर दो रिट याचिकाएं मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने सूचीबद्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट की प्रकाशित सूची के अनुसार पीठ में सीजेआई सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन आयोग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ताओं ने आयोग की बहुसदस्यीय व्यवस्था और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। मामले में अंतरिम राहत के तौर पर सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद के कार्यों से निलंबित करने की मांग भी की गई है। याचिकाओं में मीडिया रिपोर्टों के आधार पर एसआईआर  से संबंधित करीब 14 फैसलों का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन फैसलों पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्तियां दर्ज की थीं और उनकी सहमति के बिना कार्रवाई की गई। इसी आधार पर इन फैसलों को रद्द करने की मांग की गई है। एक याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह घोषित करने की मांग की गई है कि निर्वाचन आयोग जैसे बहुसदस्यीय संवैधानिक निकाय के फैसले किसी एक पदाधिकारी द्वारा एकतरफा तरीके से नहीं लिए जा सकते। साथ ही आयोग के मूल रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है, ताकि यह निर्धारित हो सके कि विवादित फैसले संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप लिए गए थे या नहीं। मामले में याचिकाकर्ताओं ने अंतरिम राहत के तौर पर ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्य करने से रोकने की मांग की है। इसके अलावा एक याचिका में उनके खिलाफ अभियोजन की मांग भी की गई है। हालांकि, ये सभी मांगें याचिकाकर्ताओं की ओर से की गई हैं और इन पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। याचिकाओं में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच आयोग या एसआईटी  गठित करने का अनुरोध किया गया है। प्रस्तावित जांच में साइबर सुरक्षा और आईटी विशेषज्ञों को शामिल करने तथा निर्वाचन आयोग के ईसीआईनेट और एरोनेट डेटाबेस का फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग रखी गई है। याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर  के दौरान मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के दावे की परिस्थितियों की जांच की मांग भी की है। इसके साथ ही सीईसी सीईसी ज्ञानेश कुमार, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग, सीमा खन्ना और कथित तौर पर जिम्मेदार अन्य अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की गई है। इस मामले में सबसे अहम सवाल निर्वाचन आयोग की बहुसदस्यीय व्यवस्था में निर्णय लेने की प्रक्रिया का है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि आयोग के संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने पहले ऐसी रिपोर्टों के संदर्भ में कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और आयुक्तों की टिप्पणियां सामान्य विचार-विमर्श की प्रक्रिया का हिस्सा थीं। ऐसे में सोमवार की सुनवाई केवल सीईसी ज्ञानेश कुमार से जुड़ी याचिकाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, एसआईआर से जुड़े निर्णयों और बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी अदालत के सामने सवाल रखे जाएंगे। अब नजर इस बात पर है कि सुप्रीम कोर्ट इन याचिकाओं पर क्या रुख अपनाता है और मांगी गई अंतरिम राहत तथा जांच संबंधी मांगों पर कोई निर्देश देता है या नहीं।