Oct 04, 2026 Login

जंतर मंतर प्रोटेस्ट: महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप,प्रियंका ने पीएम मोदी-अमित शाह से पूछा- पुलिस के व्यवहार पर चुप्पी क्यों?

Jantar Mantar Protest: Allegations of misconduct towards female journalists; Priyanka asks PM Modi and Amit Shah—why the silence on the police's conduct?

दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर 3 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बेहद शर्मनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर ही महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न और अभद्रता के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना ने न केवल पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि देश की राजनीति में भी भारी उथल-पुथल मचा दी है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 3 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों द्वारा दिल्ली पुलिसकर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न और बदसलूकी के आरोप लगाए जाने से राजनीतिक और पत्रकारिता जगत में हलचल तेज हो गई है। मामले को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब महिलाएं शांतिपूर्ण प्रदर्शन और पत्रकारिता का काम कर रही थीं, तब पुलिस के व्यवहार को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आईं। प्रियंका ने सवाल उठाया कि यदि सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस से ही महिलाएं असुरक्षित महसूस करने की शिकायत कर रही हैं तो इस मामले का संज्ञान क्यों नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से पूछा कि क्या महिलाओं के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य है और यदि नहीं, तो मामले में तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा समेत पार्टी के अन्य नेताओं ने भी मामले को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए हैं। शिकायत करने वाली एक महिला पत्रकार का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी लोगों को हिरासत में ले रहे थे और मौके पर पर्याप्त संख्या में महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थीं। पत्रकार के अनुसार, उन्होंने पुलिस के एक एसीपी से महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर सवाल किया। आरोप है कि इसी दौरान उनके साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार किया गया और उन्हें पीछे धकेला गया। पत्रकार का यह भी दावा है कि घटना के बाद वह अन्य लोगों के साथ शिकायत दर्ज कराने पुलिस थाने पहुंचीं, लेकिन तत्काल कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, पुलिस ने बाद में तीन महिला पत्रकारों की शिकायतें मिलने की पुष्टि की है। पुलिस का कहना है कि शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 3 अक्टूबर को नई दिल्ली इलाके में प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें दीं। इन शिकायतों को नई दिल्ली जिला पुलिस ने निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित किया है। जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं और घटना से जुड़े अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र जांच की प्रक्रिया चल रही है और किसी आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। उधर इस मामले ने पत्रकार संगठनों का ध्यान भी खींचा है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने महिला पत्रकारों के साथ पुलिस के कथित व्यवहार पर चिंता और निराशा जताते हुए शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। परिषद ने कहा कि पत्रकारों को बिना भय के अपना काम करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। वहीं, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी जंतर-मंतर और उसके आसपास पत्रकारों के साथ कथित व्यवहार तथा इंटरनेट बंद किए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। संगठन ने पुलिस से महिला पत्रकार की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करने और प्रदर्शन स्थल पर मीडियाकर्मियों को रिपोर्टिंग के लिए पर्याप्त जगह तथा सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। जंतर-मंतर का यह घटनाक्रम अब सिर्फ एक प्रदर्शन के दौरान हुए कथित पुलिस व्यवहार तक सीमित नहीं रह गया है। मामला महिला पत्रकारों की सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और स्वतंत्र पत्रकारिता के अधिकार से जुड़ा सवाल बन गया है। एक तरफ शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने क्राइम ब्रांच को जांच सौंपकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। अब निगाहें इस जांच पर हैं कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों की सच्चाई क्या सामने आती है और जिम्मेदारी तय होने की स्थिति में क्या कार्रवाई की जाती है।