Oct 04, 2026 Login

उत्तराखंड चुनाव के लिए एक्शन मोड में मायावती: एसआईआर और वोटर लिस्ट से हटे 9 लाख नामों पर बसपा का फोकस,आकाश आनंद की वापसी के कयास तेज

Mayawati in action mode for Uttarakhand elections: BSP focuses on deleted names from voter lists; speculation intensifies regarding Akash Anand's return.

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में उत्तराखंड के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मायावती ने साफ़ निर्देश दिए हैं कि पार्टी आगामी चुनावों में केवल योग्य और जनाधार वाले प्रत्याशियों पर ही दांव लगाएगी।

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी ने भी अपना संगठनात्मक अभियान तेज कर दिया है। बसपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को उत्तराखंड के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने साफ निर्देश दिए कि विधानसभा चुनाव में केवल योग्य और जिताऊ उम्मीदवारों को ही टिकट दिया जाए। बैठक में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची की स्थिति, बूथ स्तर तक संगठन की मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति पर भी चर्चा हुई। मायावती ने पदाधिकारियों से कहा कि एसआईआर के बाद जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हट गए हैं, उन्हें नियमों के तहत दोबारा जुड़वाने के लिए अभियान चलाया जाए। उनका कहना था कि गरीब, युवा, महिलाएं और कमजोर वर्ग के लोग अपने संवैधानिक मताधिकार से वंचित न रहें। पार्टी ने बूथ स्तर तक समितियों के पुनर्गठन की प्रगति की भी समीक्षा की और जहां कमियां हैं, उन्हें समयबद्ध तरीके से दूर करने के निर्देश दिए। बसपा की बैठक में एसआईआर के बाद मतदाता सूची में हुए बदलाव को महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में देखा गया। पार्टी के मुताबिक उत्तराखंड में करीब नौ लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं। मायावती ने पदाधिकारियों को ऐसे मतदाताओं की पहचान कर उन्हें नियमों के मुताबिक दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया में मदद करने को कहा। पार्टी की नजर खास तौर पर उन वर्गों पर है, जिन्हें वह अपना पारंपरिक सामाजिक आधार मानती रही है। बैठक के दौरान उत्तराखंड सरकार को लेकर भी मायावती ने तीखी टिप्पणी की। पार्टी पदाधिकारियों से मिली रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने राज्य सरकार की कथित गरीब और जनविरोधी कार्यशैली की आलोचना की। उनका आरोप था कि सरकार जनहित की तुलना में बड़े पूंजीपतियों और धन्नासेठों के हितों को अधिक प्राथमिकता देती नजर आती है। बसपा का संकेत है कि आगामी विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा भी उसके चुनावी अभियान का हिस्सा बन सकता है। बसपा की चुनावी तैयारियों के बीच पार्टी के भीतर आकाश आनंद की संभावित वापसी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक आकाश आनंद ने हाल में मायावती से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से माफी मांगते हुए पार्टी में दोबारा काम करने का अवसर देने का अनुरोध किया था। माना जा रहा है कि 9 अक्टूबर से पहले उनकी पार्टी में वापसी हो सकती है। आकाश आनंद को हटाए जाने के बाद मायावती ने उनके छोटे भाई ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी थी। पहले यह पद आकाश आनंद के पास था। ऐसे में यदि आकाश की वापसी होती है तो बसपा के राष्ट्रीय संगठन में एक बार फिर महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना जताई जा रही है। उत्तराखंड में चुनावी मैदान तैयार होने से पहले बसपा अब उम्मीदवारों के चयन, बूथ स्तर के संगठन और मतदाता सूची से जुड़े अभियान पर जोर दे रही है। आकाश आनंद की संभावित वापसी इस रणनीति में नया राजनीतिक आयाम जोड़ सकती है। आने वाले दिनों में पार्टी संगठन में होने वाले बदलाव और उम्मीदवारों के चयन से बसपा की उत्तराखंड चुनावी रणनीति की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।