पहली बार देहरादून से बाहर निकला 'आदि रंगोत्सव-2026': ढोल-दमाऊ की थाप पर थिरके सीएम धामी,जनजातीय शिक्षा के कायाकल्प को मिली ₹10 करोड़ की सौगात
खटीमा। उत्तराखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति और जनजातीय विरासत के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। थारू बहुल सीमांत क्षेत्र खटीमा की पावन भूमि पर तीन दिवसीय 'उत्तराखंड आदि रंगोत्सव-2026' का भव्य आगाज़ हुआ। अब तक केवल राज्य की राजधानी देहरादून तक सीमित रहने वाले इस प्रतिष्ठित आयोजन को पहली बार दूरस्थ और सीमांत इलाके में लाकर धामी सरकार ने 'प्रशासन और संस्कृति को जन-जन के द्वार तक पहुँचाने' का एक सशक्त राजनीतिक और सामाजिक संदेश दिया है।
थारू जनजाति की धरती खटीमा रविवार को देशभर की जनजातीय संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आई। पहली बार देहरादून से बाहर आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय उत्तराखंड आदि रंगोत्सव-2026 का खटीमा में भव्य आगाज हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उद्घाटन अवसर पर 18 राज्यों से पहुंचे जनजातीय कलाकारों ने अपनी लोक संस्कृति और पारंपरिक नृत्य-संगीत की प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पूरा आयोजन स्थल देश की विविध जनजातीय परंपराओं के रंग में रंग गया। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले खटीमा मुख्य चौक से आयोजन स्थल तक भव्य रोड शो निकाला गया। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उमड़े। स्थानीय लोगों ने पारंपरिक अंदाज में अतिथियों का स्वागत किया। रोड शो के दौरान जनजातीय संस्कृति और स्थानीय लोक परंपराओं की झलक भी देखने को मिली। आदि रंगोत्सव के मंच पर उत्तराखंड की लोक संस्कृति का रंग भी खूब चढ़ा। जौनसार-भाबर की ढोल-दमाऊ टीम के कलाकारों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप से माहौल को जीवंत कर दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी खुद को रोक नहीं पाए और कलाकारों के साथ ढोल-दमाऊ की थाप पर झूमते नजर आए। उन्होंने ढोल भी बजाया और कलाकारों के साथ लोक संस्कृति के रंग में रंगते दिखाई दिए। इस दौरान विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में हनुमान अंश की टीम ने भी विशेष रूप से प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने टीम के कलाकारों का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि आयोजन में हनुमान अंश की टीम की मौजूदगी को वह भगवान हनुमान के आशीर्वाद के रूप में देखते हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड आदि रंगोत्सव का आयोजन अब तक देहरादून में होता रहा है, लेकिन पहली बार इसे खटीमा में आयोजित किया गया है। थारू जनजाति की धरती पर आयोजन होने से इसकी विशेष महत्ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन देश की जनजातीय विरासत, लोक कला और सांस्कृतिक विविधता को नई पहचान देने का माध्यम बनते हैं। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने खटीमा स्थित एकलव्य विद्यालय के आधुनिकीकरण के लिए 10 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। इस घोषणा को जनजातीय क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण सौगात माना जा रहा है। विद्यालय के आधुनिकीकरण से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और जुएल ओराम ने आयोजन में आमंत्रित किए जाने के लिए मुख्यमंत्री धामी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को मंच देने वाले ऐसे कार्यक्रम देश की सांस्कृतिक विविधता को मजबूत करते हैं। आदि रंगोत्सव सिर्फ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा। आयोजन स्थल पर विभिन्न स्टॉल लगाए गए, जहां स्थानीय उत्पादों और जनजातीय हस्तशिल्प को प्रदर्शित किया गया। इससे स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों को अपने उत्पादों को व्यापक मंच देने का अवसर मिला। कार्यक्रम में थारू समाज के साथ बड़ी संख्या में अन्य समुदायों के लोग भी पहुंचे। आयोजन के अगले चरण में जनजातीय कलाकारों के अलावा लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। शाम को स्टार कलाकार श्वेता माहरा और लोक गायिका माया उपाध्याय प्रस्तुति देंगी। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, नैनीताल सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री खजान दास, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। खटीमा में आदि रंगोत्सव का आयोजन इस लिहाज से भी खास है कि पहली बार प्रदेश की जनजातीय संस्कृति का यह बड़ा मंच थारू समाज की धरती पर सजा है। 18 राज्यों के कलाकारों की मौजूदगी ने इसे राष्ट्रीय स्वरूप दिया, वहीं स्थानीय संस्कृति, उत्पादों और कलाकारों को मिले मंच ने आयोजन को क्षेत्रीय पहचान से भी जोड़ा। तीन दिनों तक खटीमा देशभर की जनजातीय कला और संस्कृति का केंद्र बना रहेगा।