सावन के पहले सोमवार पर 'हर-हर महादेव' से गूंजा उत्तराखंड! बैजनाथ, कोटेश्वर, रिश्वेश्वर समेत शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, जलाभिषेक कर भक्तों ने मांगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

 Uttarakhand resonated with chants of 'Har-Har Mahadev' on the first Monday of Sawan! A massive surge of devotees was witnessed at Shiva temples—including Baijnath, Koteshwar, and Rishweshwar—where t

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में सावन माह के पहले सोमवार को भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। प्रदेश के प्रसिद्ध शिवधामों और प्राचीन मंदिरों में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने दूध, गंगाजल, जल, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, खुशहाली और विश्व कल्याण की कामना की। बागेश्वर के विश्व प्रसिद्ध बैजनाथ धाम, चंपावत के रिश्वेश्वर महादेव मंदिर, रुद्रप्रयाग के कोटेश्वर महादेव सहित प्रदेश के विभिन्न शिवालयों में दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कई स्थानों पर बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। प्रशासन और पुलिस ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए थे।

बैजनाथ धाम में भोर से लगी श्रद्धालुओं की कतार
बागेश्वर जिले के विश्व प्रसिद्ध बाबा बैजनाथ मंदिर में सावन के पहले सोमवार पर अलसुबह से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। उत्तराखंड ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे और भगवान शिव का दूध व जल से अभिषेक किया। मंदिर परिसर में घंटों तक श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। गोमती नदी के तट पर स्थित बैजनाथ धाम का प्राकृतिक सौंदर्य और शिवभक्ति का माहौल श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करता रहा। श्रद्धालुओं ने पार्थिव पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं भगवान भोलेनाथ के समक्ष रखीं। मान्यता है कि बैजनाथ धाम में सच्चे मन से की गई पूजा और जलाभिषेक से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर के पुजारियों ने बताया कि सावन माह का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की विशेष आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु दूध, दही, जल और पंचामृत से अभिषेक करने के साथ-साथ पार्थिव शिवलिंग बनाकर विशेष पूजा भी करते हैं। उन्होंने बताया कि सावन भर बैजनाथ धाम में भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

चंपावत में बारिश भी नहीं रोक सकी आस्था
चंपावत जिले के सभी प्रमुख शिवालयों में भी सावन के पहले सोमवार को सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ रही। विशेष रूप से लोहाघाट स्थित प्रसिद्ध रिश्वेश्वर महादेव मंदिर में सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। लगातार हो रही बारिश के बावजूद श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। भक्तों ने भगवान शिव का दूध, जल, बेलपत्र, पुष्प और भस्म से अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। कई श्रद्धालुओं ने ब्राह्मणों के माध्यम से रुद्राभिषेक और विशेष वैदिक अनुष्ठान भी कराए। महिलाओं में सावन सोमवार को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। व्रत रखकर मंदिर पहुंची महिलाओं ने बताया कि उन्हें पूरे वर्ष सावन के सोमवार का इंतजार रहता है। उनका विश्वास है कि भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने और सोमवार का व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा परिवार पर महादेव की विशेष कृपा बनी रहती है। जिले के बालेश्वर, रामेश्वर, पंचेश्वर, पूर्णेश्वर और अन्य प्राचीन शिव मंदिरों में भी दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही।

कोटेश्वर महादेव में सुरक्षा के बीच हुआ जलाभिषेक
रुद्रप्रयाग जिले के प्रसिद्ध कोटेश्वर महादेव मंदिर में भी सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह तड़के से ही मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर देश-दुनिया में सुख, शांति, समृद्धि और विश्व कल्याण की प्रार्थना की। हालांकि लगातार हो रही बारिश के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एसडीआरएफ (SDRF) और डीडीआरएफ (DDRF) की टीमें पूरे समय तैनात रहीं। नदी के तेज बहाव को देखते हुए श्रद्धालुओं को सीधे नदी किनारे जाने की अनुमति नहीं दी गई। सुरक्षा बलों के जवान स्वयं अलकनंदा से जल भरकर श्रद्धालुओं तक पहुंचाते रहे, ताकि वे सुरक्षित तरीके से भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकें। श्रद्धालुओं ने प्रशासन की इस व्यवस्था की सराहना की।

शिवालयों में दिनभर चलता रहा पूजा-अर्चना का क्रम
प्रदेशभर के मंदिरों में सुबह से देर शाम तक रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, भजन-कीर्तन, पार्थिव पूजन और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। मंदिरों में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण भी किया गया। कई स्थानों पर स्वयंसेवी संस्थाओं ने जल, शर्बत और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था भी की। पुजारियों और धर्माचार्यों ने बताया कि सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। विशेष रूप से सावन के सोमवार का व्रत और विधि-विधान से की गई पूजा का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।