Oct 10, 2026 Login
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उत्तराखंड:होम स्टे योजना!पलायन रोकते ग्रामीण इलाकों के ये होम स्टे!वीरान और खंडहर बन चुके गांव के घरों का सौंदर्यीकरण करवा कर पर्यटकों को कर रहे हैं आकर्षित!नाश्ता भी ठेठ पहाड़ी खाकर मजा आ जाये

Uttarakhand: Preventing migration and promoting tourism, these homestays in rural areas are attracting tourists by beautifying the houses of the deserted and ruined villages! Enjoy breakfast by eatin

उत्तराखंड से युवाओं का पलायन एक बड़ी समस्या है। लॉक डाउन में घर वापस लौटे प्रवासी उत्तराखंडी युवाओं ने ये जान लिया था कि मुसीबत में अपना घर ही आपको सुरक्षा दे सकता है। लॉक डाउन से मिली सीख के बाद कई युवाओं ने अपने ही शहर अपने ही गांव में कुछ करने की ठानी और ऐसे कई युवाओं की कहानी सामने आ चुकी है जब उन्होंने  गांव में ही शहरों के मुकाबले ज्यादा बेहतर रोजगार के विकल्प निकाल लिए।


ऐसा ही एक विकल्प है गांवों के गोठ के साथ बने पहाड़ी कच्चे मकानों को होम स्टे में बदलना। आप यकीन मानिए पहले जब ये कल्पना मात्र थी तब किसी को यकीन नही था कि ग्रामीण क्षेत्र के ये मकान जो शहरों के मकान से बिल्कुल अलग है, जो गांवों के रहन सहन को दर्शाते हैं वो होम स्टे भी बन सकते है। ग्रामीण इलाकों में शानदार,उत्तराखंड की संस्कृति को दर्शाते होंम स्टे का नया प्रयोग सोशल मीडिया में खूब प्रचलित होने लगा है। अब लोग तेजी से अपने गांव के इन पुराने मकानों को एक नए सांस्कृतिक साज सज्जा के अंदाज में ढाल कर पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। 


यहाँ सुबह नाश्ते में बद्री गाय की छांछ , मंडुवे की रोटी , हरी पत्तेदार भुज्जी ,लाल भुनी मिर्च,मक्खन, और प्राकृतिक सौंदर्य साथ मे। यानी सुबह का नाश्ता ही ऐसा जिससे इस देवभूमि में आकर आत्मा ही तृप्त हो जाय। बाहर से आने वाले सैलानियों खासकर विदेशी पर्यटकों को ये देसी आईडिया खूब भाने लगा है। ये पर्यटक गांव की ज़िंदगी को करीब से देखने के लिए गांव वालों के साथ गाय ,बकरी  चराने जंगलों में भी  जाने लगे हैं।गांव वाले भी कमाल के है उन पर्यटकों से वापसी में लकड़ी भी सरवा रहे हैं। और ये सब करने में पर्यटकों को भी खूब मजा आने लगा है। उन्हें लगता है जैसे किसी ट्रैक पर निकल गए हो। ये पर्यटक गांव वालों के साथ मिलकर खेतों से साग,सब्जी भी तोड़ते है,इतना ही नही घर के बहार लकड़ी के चूल्हे में खाना भी मिलकर बनवा रहे हैं । अपने काम धंधों के साथ साथ ग्रामीण, पर्यटन के क्षेत्र में भी कमाल कर रहे हैं। पर्यटकों के लिए अपने घरों को विश्राम स्थल के रूप में होम स्टे के रूप में तब्दील कर वित्तीय स्थिति में सुधार करने के साथ साथ गांवों से होने वाले पलायन को रोकने में अहम भूमिका निभा रहा है।

इन ग्रामीण इलाकों में खूब यूट्यूबर्स भी खूब आ रहे हैं। इन क्षेत्रों में आकर खूब व्यू कमा रहे हैं औऱ इसी के माध्यम से ग्रामीण भाई भी कुछ कमाई करने लगे है।


ये होम स्टे पुराने घर के ढांचे को बिना तोडफ़ोड़ किये मोडिफाई कर दिए गए है। नीचे जहाँ गोठ होती है वहाँ एक ओर रिसेप्शन बना दिया गया,सीढ़ियों और बाहरी दीवारों को उत्तराखंड की संस्कृति के मुताबिक रंग रोगन कर दिया गया है। अंदर छोटे छोटे कमरों में सिंगल बेड से लेकर डबल बेड लगाए गए है। इन कमरो में किसी भी तरह के कोई पंखे या एसी की ज़रूरत ही महसूस नही होती ये प्राकृतिक रूप से ही ठंडे और आरामदायक है। 


ग्रामीण इलाकों में जहाँ ऐसे ही मकान वीरान पड़े है उन्हें अगर इसी तरह बिना तोड़फोड़ किये सजाया जाए और पर्यटकों के लिए होम स्टे में तब्दील कर दिया जाए तो उत्तराखंड के कई लोगो को ग्रामीण इलाकों में ही रोजगार मिल सकता है।तो देर किस बात की भई? अब तो इसके लिए कैबिनेट ने भी होम स्टे योजना में अधिकतम सब्सिडी 15 रुपये या लागत का 50 फीसदी जो भी आये,पर मुहर लगाकर इस ओर एक सराहनीय कार्य किया।


 आज भी कई लोग उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन को पसन्द करते है यहाँ के रहन सहन को कई विदेशी पर्यटकों ने भी अपने सोशल मीडिया अकॉउंट से शेयर किया है। 
सरकार द्वारा भी ऐसे ग्रामीण इलाकों के इन घरों का सौंदर्यीकरण करवा कर पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे ग्रामीणों को इन घरों के सौंदर्यीकरण के लिए लोन उपलब्ध करवा कर उनकी मदद कर पलायन को रोकने में सरकार अहम भूमिका निभा रही है।
उत्तराखंड में दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास (होम स्टे) योजना को पहले से आसान बनाया है। 
उत्तराखंड होम स्टे योजना सहायता-
मैदानी जिलों के लिए लागत का 25% या अधिकतम 7.50 लाख रुपये मूल सब्सिडी और अधिकतम ब्याज सब्सिडी लाभ ₹100000 प्रति वर्ष 5 साल के लिए।
पहाड़ी जिलों के लिए लागत का 33% या अधिकतम एक लाख की मूल सब्सिडी और अधिकतम ब्याज सब्सिडी रुपए डेढ़ लाख प्रति वर्ष 5 साल के लिए।

कोरोना काल मे जब आर्थिक रूप से हर किसी कप तोड़कर रख दिया और ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी समस्या रोजगार की आ गयी तब होम स्टे योजना उनके लिए एक बड़ा सहारा बन कर सामने आई है।