उत्तराखंड:क्या आपने बर्फ की नदी देखी है? उत्तराखंड में यहाँ बह रही है बर्फ की नदी,एक ओर आकर्षण का केंद्र तो दूसरी ओर ख़तरे की घँटी
आपने कभी बर्फ की नदी देखी है? जी हां बर्फ की नदी! नही देखी? उत्तराखंड में इनदिनों बर्फ की नदी बहती दिखाई दे रही है। दिखने में ये नदी भले ही खूबसूरत लग रही हो लेकिन पर्यावरण के मद्देनजर बर्फ की नदी अच्छा संकेत नही है।
दरअसल इन दिनों मौसम में गर्मी का असर हिमालयी क्षेत्रों में भी दिखने लगा है। गर्मी से हिमखंडो का पिघलना शुरू हो गया तो हेमकुंड यात्रा मार्ग पर काकभुशुंडी की पहाड़ियों में हिमखंड पिघलकर नाले में बहने लगी है जिसकी तस्वीरें लोग अपने कैमरों में कैद कर रहे है। हेमकुंड यात्रा मार्ग पर यात्रा की तैयारियों में लगे गुरूद्वारा श्री हेमकुंड साहेब मेनेजमेंट ट्रस्ट के मुख्य प्रबंधक सेवा सिंह ने इसका वीडियो भी बनाया है और शेयर करते हुए कहा कि यह तो इस क्षेत्र में आम बात है।
गौरतलब है कि हिमालय से 100 से ज्यादा छोटी-बड़ी नदियां निकलती हैं। ग्लेशियर जब पिघलते हैं तो इस पर चढ़ा कार्बन पानी के साथ बह कर लोगों तक पहुंच जाता है जो मानव सेहत के लिए खतरनाक साबित होता है। भारत में हिमालय से कुल 9975 हिमखंड हैं। बात की जाए उत्तराखंड की तो इसके क्षेत्र में 900 हिमखंड आते हैं। बताया जाता है कि इन हिमखंडों से ही अधिकतर नदियां निकलती हैं, जो देश की 40 प्रतिशत आबादी को सिंचाई, पेयजल व रोजगार के कई संसाधन उपलब्ध कराती हैं।
वही जहां दुनियाभर में ग्लेशियर के पिघलने पर व्यापक तौर पर अध्ययन किया जाता है, लेकिन पृथ्वी की सबसे ऊंची चोटी पर मौजूद ग्लेशियर पर बहुत ही कम ध्यान दिया गया। यदि धरती पर गर्मी इसी तरह दिनों-दिन बढ़ती रही तथा ग्लेशियर पिघलने के साथ ही टूटने जारी रहे तो इनका सीधा प्रभाव समुद्र का जलस्तर बढऩे एवं नदियों के अस्तित्व पर पडऩा निश्चित है। कई छोटे-छोटे द्वीप और समुद्र तटीय शहर जलमग्न हो जाएंगे। हालांकि वैज्ञानिक अभी भी यह तय नहीं कर पाए हैं कि इस तरह की घटनाओं को प्राकृतिक माना जाए या इसके लिए सिर्फ जलवायु परिवर्तन ही जिम्मेदार है। अब यह सवाल भी खड़ा होता है कि हम इसका मुकाबला कैसे करेंगे। हमें हिमखंडों को टूटने या पिघलने से बचाने के लिए दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही औद्योगिक गतिविधियों को भी कुछ समय के लिए विराम देना चाहिए।