Oct 11, 2026 Login
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उत्तराखंड विधानसभा बैकडोर भर्ती घोटाला:व्यक्तिगत आवेदनों पर ही कर दी गयी थी भर्तियां!खुलासे के बाद 250 बैकडोर भर्तियां हुई रद्द,घोटालेबाज पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुंजवाल के बदले बोल-मैंने गलत किया तो जनता ने मुझे बैठा दिया घर

Uttarakhand Assembly Backdoor Recruitment Scam: Recruitment was done on personal applications only! After the revelations, 250 backdoor recruitments were canceled, speaking in lieu of scamster former

उत्तराखंड में विभिन्न विभागों में भर्ती घोटालों को लेकर इनदिनों राजनीति गर्मायी हुई है साथ ही आम जनता में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ खास गुस्सा व्याप्त है। पिछले दिनों जहाँ उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में परीक्षा पेपर लीक हो जाने के मामले में सरकारी नौकरियों में भर्ती के घोटालों की पोल खोल दी तो वही विधानसभा में भर्ती घोटालों पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और मौजूदा सरकार में वित्त मंत्री प्रेम चन्द्र अग्रवाल निशाने पर है। गोविंद सिंह कुंजवाल ने खुल्लमखुल्ला ये स्वीकार तक किया कि उनके बहु बेटे बेरोजगार थे तो उनको बैकडोर से भर्ती दी। मामले को तूल पकड़ता देख सीएम धामी ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी को घोटालों की जांच के आदेश दिए। 

जिसपर बड़ी कार्यवाही करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने विधानसभा में बैकडोर से हुईं 250 भर्तियां रद्द कर दी हैं। इनमें 228 तदर्थ और 22 उपनल के माध्यम से हुईं नियुक्तियां शामिल हैं। वहीं, विधानसभा सचिव मुकेश सिंघल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करते हुए उनके खिलाफ जांच बैठा दी गई है।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने विधानसभा में प्रेस वार्ता बुलाई। उन्होंने बताया कि विधानसभा में हुईं भर्तियों की जांच के लिए बनी तीन सदस्यीय विशेषज्ञ जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। इस रिपोर्ट की सिफारिश के आधार पर उन्होंने 2016 में हुईं 150 तदर्थ नियुक्तियां, 2020 में हुईं छह तदर्थ नियुक्तियां, 2021 में हुईं 72 तदर्थ नियुक्तियां और उपनल के माध्यम से हुईं 22 नियुक्तियां रद्द कर दी हैं। उन्होंने कहा कि समिति ने अपनी जांच में पाया है कि इन भर्तियों में नियमों का पालन नहीं किया गया। न विज्ञप्ति निकाली और न आवेदन मांगे, अपनाई गई यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद-14 और अनुच्छेद-16 का उल्लंघन है।
2016 की जो 150 भर्तियां रद्द की गई हैं, वह कांग्रेस सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे गोविंद सिंह कुंजवाल के कार्यकाल में हुई थीं। 2020 की छह, 2021 की 72 तदर्थ व 22 उपनल की भर्तियां भाजपा सरकार में विस अध्यक्ष रहे प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में हुई थीं।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि 2011 से पहले विधानसभा में जो नियुक्तियां हुई थीं, वह कर्मचारी नियमित हो चुके हैं। उनकी नियुक्ति कैसे हुई, नियमितिकरण कैसे किया गया, पदोन्नतियां कैसे हुईं, इस पर विधिक राय लेने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा भर्तियां रद्द करने के निर्णय पर विधानसभा अध्यक्ष रहे गोविंद सिंह कुंजवाल ने एक बार फिर अपनी गलती को स्वीकार तो किया है,लेकिन हटाए गए कर्मचारियों का पक्ष भी लिया है । उन्होंने कहा ,जिनकी नौकरी गई , उनका कोई कसूर नहीं है । मैंने गलत किया , इसकी सजा जनता ने मुझे घर बिठाकर पहले ही दे दी है । अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि विधानसभा एक सांविधानिक संस्था है और इसके स्पीकर को सांविधानिक अधिकार प्राप्त हैं । कार्यपालिका का कोई भी व्यक्ति विधानसभा से संबंधित जांच नहीं कर सकता है । न ही आज तक देश में कहीं ऐसा हुआ है । उन्होंने कहा कि विधानसभा के किसी भी मामले में कोई जज ही जांच कर सकता है । चाहे फिर वह जिला जज हो या सुप्रीम कोर्ट का जज उन्होंने कहा कि नियुक्तियों के संबंध में अब जो निर्णय हुआ है , वह वैधानिक और विधिसम्मत नहीं है ,यह निर्णय विशुद्ध रूप से राजनीतिक है ।