उत्तराखण्ड: किच्छा का 28 साल पुराना हाई प्रोफाइल डकैती मामला! हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, सभी आरोपी बरी! जानें क्या है पूरा मामला?

Uttarakhand: A 28-year-old high-profile robbery case from Kichha! The High Court heard the case, and all the accused were acquitted! Find out what the full story is.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऊधम सिंह नगर जिले के किच्छा में वर्ष 1998 के बहुचर्चित डकैती के मामले में निचली अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए रजमत खान उर्फ पप्पू, इसरत और कमरुद्दीन समेत अन्य आरोपियों को बरी करने के मामले पर सुनवाई की। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा है। इसलिए इन्हें इस केस से बरी किया जाता है। 
मामले के अनुसार 22/23 मई 1998 की रात करीब 8-9 लोगों ने एक घर में घुसकर हमला किया, परिवार को बंधक बनाया और सोने-चांदी के आभूषण लूट लिए। घटना में एक महिला को भी चोटें आई थीं। इस प्रकरण में निचली अदालत ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 395 (डकैती) और 412 के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली का मूल सिद्धांत है कि आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक उसका दोष संदेह से परे सिद्ध न हो जाए। अदालत ने पाया कि पहचान, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों में कई विसंगतियां हैं, जिससे अभियोजन का मामला कमजोर हो जाता है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि निचली अदालत द्वारा साक्ष्यों का मूल्यांकन अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। ऐसे में संदेह का लाभ आरोपियों को दिया जाना चाहिए। इन्हीं आधारों पर उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के निर्णय को रद्द करते हुए सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया। यह निर्णय न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने दिया।