कर्नाटक में सत्ता का नया अध्याय: संविधान की प्रति हाथ में लेकर डीके शिवकुमार ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ! जी. परमेश्वर बने उपमुख्यमंत्री, छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री तक का सफर

A new chapter in power in Karnataka: DK Shivakumar takes oath as Chief Minister, holding a copy of the Constitution! G. Parameshwara becomes Deputy Chief Minister, a journey from student politics to

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में बुधवार को एक नया अध्याय जुड़ गया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। राजधानी बेंगलुरु में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर डीके शिवकुमार ने हाथ में संविधान की प्रति लेकर शपथ ली, जिसे कांग्रेस ने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। उनके साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता जी. परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कांग्रेस ने शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ संगठनात्मक एकता का भी संदेश देने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के अलावा मंत्रिपरिषद के विस्तार के तहत 12 अन्य नेताओं को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इनमें कई अनुभवी नेताओं के साथ-साथ नए चेहरों को भी शामिल किया गया है। विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया को मंत्रिमंडल में स्थान मिलने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया उस समय शुरू हुई जब तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 28 मई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 30 मई को बेंगलुरु में कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। दिलचस्प बात यह रही कि मुख्यमंत्री पद के लिए शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव स्वयं सिद्धारमैया ने रखा, जिससे पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश गया। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद से ही शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया था। बुधवार को शपथ ग्रहण के साथ उन्होंने औपचारिक रूप से राज्य की कमान संभाल ली।

छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री तक का सफर
डीके शिवकुमार का राजनीतिक सफर संघर्ष, संगठन क्षमता और निरंतर सक्रियता का उदाहरण माना जाता है। उन्होंने 1980 के दशक की शुरुआत में छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। वर्ष 1979 में जब तत्कालीन नेता देवराज उर्स और उनके समर्थकों ने कांग्रेस से अलग राह चुनी, उसी दौर में शिवकुमार ने छात्र नेता के रूप में कांग्रेस में अपनी पहचान बनानी शुरू की। राजनीतिक जीवन के शुरुआती वर्षों में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 1985 में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन एनएसयूआई ने उन्हें छात्र चुनाव का टिकट नहीं दिया था। इसी दौरान भाजपा नेता अनंत कुमार ने भी उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जोड़ने का प्रयास किया, लेकिन शिवकुमार कांग्रेस के साथ ही बने रहे।

पहली हार के बाद नहीं मानी हार
डीके शिवकुमार ने अपना पहला विधानसभा चुनाव 1985 में साठनूर सीट से लड़ा था। उस समय उनके मुकाबले में कर्नाटक के दिग्गज नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा थे। इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने राजनीति से दूरी नहीं बनाई। चार वर्ष बाद 1989 में मात्र 27 वर्ष की आयु में उन्होंने मैसूरु जिले के साठनूर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान स्थापित की। कांग्रेस संगठन में डीके शिवकुमार को एक प्रभावशाली रणनीतिकार और कुशल प्रबंधक के रूप में देखा जाता है। पार्टी के कठिन दौर में उन्होंने कई बार संगठन को मजबूत करने और विधायकों को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने पार्टी को मजबूत करने में अहम योगदान दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल केवल प्रशासनिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। कर्नाटक देश के उन प्रमुख राज्यों में शामिल है, जहां कांग्रेस सत्ता में है और पार्टी आगामी चुनावी रणनीतियों के लिए इस राज्य को एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है।

नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां
हालांकि सत्ता संभालने के साथ ही नई सरकार के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन, निवेश आकर्षित करने, किसानों की समस्याओं के समाधान और सामाजिक कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे मुद्दे सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होंगे। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी। इसके साथ ही उन्हें जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए विकास और सुशासन का मॉडल प्रस्तुत करना होगा। फिलहाल कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के गठन और डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के साथ राज्य की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नई सरकार अपने वादों और योजनाओं को किस प्रकार धरातल पर उतारती है और राज्य के विकास को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।