Aug 28, 2026 Login

रक्षाबंधनः सिर्फ कलाई पर धागा नहीं, प्रेम और रक्षा के संकल्प का पर्व! इंद्राणी से लेकर यमुना, लक्ष्मी और द्रौपदी तक, राखी की परंपरा से जुड़ी हैं कई रोचक मान्यताएं

Raksha Bandhan: More than just a thread on the wrist—a festival celebrating love and the vow of protection! From Indrani to Yamuna, Lakshmi, and Draupadi, many fascinating legends are associated with

नई दिल्ली। भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और अपनत्व का पर्व रक्षाबंधन आज देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सावन पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले इस त्योहार में बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और भाई उसकी रक्षा, सम्मान और हर सुख-दुख में साथ निभाने का संकल्प लेता है। बाजारों से लेकर घरों तक राखियों की रौनक है और बहनें अपने भाइयों की कलाई सजाने के लिए विशेष तैयारियां कर रही हैं। रक्षाबंधन केवल एक पारिवारिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके साथ कई पौराणिक कथाएं और लोकमान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। इन कथाओं में रक्षा सूत्र को प्रेम, विश्वास, सुरक्षा, मंगलकामना और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक बताया गया है। हालांकि, इन सभी कथाओं को ऐतिहासिक तथ्य नहीं माना जा सकता। कुछ प्रसंग धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जबकि कुछ लोककथाओं के रूप में प्रचलित हैं।

इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर बांधा था रक्षा सूत्र
रक्षाबंधन से जुड़ी एक प्रमुख पौराणिक कथा देवताओं के राजा इंद्र और उनकी पत्नी इंद्राणी से संबंधित है। मान्यता के अनुसार एक समय देवताओं और असुरों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया था। लंबे समय तक चले संघर्ष में देवताओं की स्थिति कमजोर होने लगी और इंद्र भी संकट में पड़ गए। ऐसे समय में इंद्राणी ने भगवान विष्णु की आराधना की। उन्होंने मंत्रोच्चार के साथ एक पवित्र रक्षा सूत्र तैयार किया और उसे इंद्र की कलाई पर बांधा। इसके बाद इंद्र ने नए आत्मविश्वास और शक्ति के साथ युद्ध किया और देवताओं को विजय प्राप्त हुई। इस कथा के आधार पर रक्षा सूत्र को संकट के समय साहस, सुरक्षा और विजय का प्रतीक माना जाता है। यह प्रसंग इस बात का भी संकेत देता है कि किसी प्रियजन के प्रति विश्वास और शुभकामना व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में मानसिक शक्ति दे सकती है।

यमुना ने यमराज को बांधी राखी
रक्षाबंधन से जुड़ी दूसरी प्रसिद्ध कथा सूर्यपुत्री यमुना और उनके भाई यमराज से संबंधित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यमुना अपने भाई यमराज से मिलने की लंबे समय से प्रतीक्षा कर रही थीं। एक दिन यमराज उनके घर पहुंचे। यमुना ने भाई का प्रेम और सम्मान के साथ स्वागत किया। उन्होंने पूजा.-अर्चना की और यमराज की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। बहन के स्नेह से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया कि जो बहन प्रेम और श्रद्धा से अपने भाई को रक्षा सूत्र बांधेगी, उसके भाई को सुख, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होगा। इसी मान्यता के कारण रक्षाबंधन को भाई की मंगलकामना और दीर्घायु से जोड़कर भी देखा जाता है। यह कथा भाई-बहन के बीच प्रेम और स्नेह की भावना को प्रमुखता देती है।

माता लक्ष्मी ने राजा बलि को बनाया भाई
रक्षाबंधन की एक अन्य चर्चित पौराणिक कथा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और राजा बलि से जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने राजा बलि को दिए गए वचन के कारण कुछ समय उनके राज्य में रहने का निर्णय लिया था। माता लक्ष्मी भगवान विष्णु को अपने साथ वापस लाना चाहती थीं। इसके बाद वे राजा बलि के पास पहुंचीं और उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें अपना भाई मान लिया। राजा बलि ने भी इस रिश्ते को सम्मान के साथ स्वीकार किया। कथा के अनुसार, बहन के रूप में माता लक्ष्मी का सम्मान करते हुए राजा बलि ने भगवान विष्णु को उनके साथ जाने की अनुमति दे दी। इस प्रसंग से यह संदेश मिलता है कि भाई-बहन का रिश्ता केवल जन्म से ही नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और सम्मान से भी स्थापित हो सकता है।

द्रौपदी और भगवान कृष्ण का स्नेह
रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे लोकप्रिय कथाओं में भगवान कृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग भी शामिल है। महाभारत से जुड़ी प्रचलित मान्यता के अनुसार एक बार भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लग गई थी। यह देखकर द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का एक हिस्सा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया। द्रौपदी के इस स्नेह और अपनत्व से भगवान कृष्ण प्रभावित हुए। मान्यता है कि उन्होंने द्रौपदी की रक्षा का संकल्प लिया। आगे चलकर कौरव सभा में द्रौपदी के अपमान के प्रसंग में भगवान कृष्ण ने उनकी लाज की रक्षा की। यह कथा रक्षाबंधन के मूल भाव को बेहद खूबसूरती से सामने रखती है। इसमें रक्षा सूत्र से अधिक उसके पीछे छिपे प्रेम, विश्वास और अपनत्व को महत्व दिया गया है। यानी किसी रिश्ते की मजबूती केवल रस्म निभाने से नहीं, बल्कि जरूरत के समय एक-दूसरे के साथ खड़े रहने से होती है।

राखी की डोर में छिपा है रिश्तों का विश्वास
रक्षाबंधन का पर्व हमें यह याद दिलाता है कि भाई-बहन का रिश्ता केवल एक दिन की रस्म नहीं है। यह जीवनभर एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने, सम्मान देने और जरूरत पड़ने पर मदद करने का भाव है। आज जब बहन भाई की कलाई पर राखी बांधेगी और भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेगा, तो यह सिर्फ एक परंपरा का निर्वाह नहीं होगा। इसके साथ उन भावनाओं को भी दोहराया जाएगा, जिन्होंने सदियों से इस पर्व को भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान दिया है।