पंतनगर सिडकुल में 'नोएडा' जैसी श्रमिक क्रांति: 21 हजार न्यूनतम वेतन की मांग पर अड़े हजारों मजदूर, पुलिस छावनी में तब्दील औद्योगिक क्षेत्र
रुद्रपुर। उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुए बड़े श्रमिक आंदोलन की चिंगारी अब उत्तराखंड के सबसे बड़े औद्योगिक केंद्र पंतनगर तक पहुँच गई है। शुक्रवार को सिडकुल क्षेत्र की कई दिग्गज कंपनियों के हजारों श्रमिक अपनी मांगों को लेकर अचानक काम बंद कर धरने पर बैठ गए। आंदोलन की उग्रता और श्रमिकों की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।
पंतनगर सिडकुल स्थित ए जाकी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बडवे, अनसूया ऑटो प्रेस और बेला राइस जैसी प्रमुख कंपनियों के कर्मचारी सुबह से ही कंपनी परिसर के बाहर एकत्र होने लगे। श्रमिकों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें मात्र 11,500 रुपये मासिक वेतन मिल रहा है, जिससे इस कमरतोड़ महंगाई में परिवार पालना असंभव हो गया है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 21,000 रुपये किया जाए। इसके अलावा, श्रमिकों ने सुरक्षित परिवहन (ट्रांसपोर्ट) सुविधा की भी मांग उठाई है। अकेले ए जाकी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में करीब 16,000 श्रमिक तीनों शिफ्टों में काम करते हैं। इसके साथ ही अनसूया ऑटो प्रेस के 1,000 और अन्य कंपनियों के हजारों मजदूरों के एक साथ सड़कों पर उतरने से औद्योगिक क्षेत्र का चक्का जाम हो गया है। श्रमिकों की एकजुटता ने कंपनी प्रबंधनों के हाथ-पांव फुला दिए हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे। नोएडा आंदोलन की तर्ज पर यहाँ भी स्थिति उग्र न हो जाए, इसके लिए प्रशासन ने मुस्तैदी बढ़ा दी है। मौके पर कई थानों की पुलिस, पीएसी और खुफिया विभाग की टीमें तैनात की गई हैं। श्रम विभाग भी इस मामले में सक्रिय हो गया है। श्रम निरीक्षक अरविंद सैनी ने मौके पर पहुँचकर कंपनी प्रबंधन और श्रमिक प्रतिनिधियों के बीच मध्यस्थता शुरू की है। प्रशासन का पूरा जोर बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने पर है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। स्थानीय जानकारों का मानना है कि लंबे समय से वेतन न बढ़ना और औद्योगिक नीतियों में ढील इस बड़े आंदोलन का मुख्य कारण है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन उत्तराखंड के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों तक भी फैल सकता है। फिलहाल, पूरे पंतनगर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और सभी की नजरें प्रशासन और प्रबंधन के बीच चल रही वार्ता के नतीजों पर टिकी हैं।