Aug 20, 2026 Login

नीट पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट में ढिलाई! सीबीआई नहीं सौंप सकी अहम दस्तावेज, अब 3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

NEET Paper Leak: Lapses in Fast-Track Court! CBI fails to submit crucial documents; next hearing set for August 3.

नई दिल्ली। देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के भविष्य से जुड़े बहुचर्चित 'नीट-यूजी पेपर लीक' मामले में त्वरित न्याय की उम्मीदों को फिलहाल झटका लगा है। मामले के शीघ्र निपटारे के लिए गठित 'फास्ट ट्रैक कोर्ट' में सीबीआई द्वारा समय पर ज़रूरी दस्तावेज़ और बयानों की सूची उपलब्ध न कराए जाने के कारण सुनवाई की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई भले ही फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो रही हो, लेकिन जांच एजेंसी सीबीआई की ओर से जरूरी दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण मामले की रफ्तार फिलहाल थम गई है। विशेष न्यायाधीश अनु गोयल बलीगा ने दस्तावेजों के अभाव में सुनवाई आगे बढ़ाते हुए अगली तारीख 3 अगस्त तय की है और सीबीआई को तीन दिन के भीतर सभी जरूरी दस्तावेज तथा गवाहों के बयानों की सूची अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। सीबीआई ने इस बहुचर्चित मामले में करीब 20 हजार पेज की चार्जशीट दाखिल की है। हालांकि आरोपपत्र के साथ कुछ अहम दस्तावेज और गवाहों की सूची अभी तक अदालत में पेश नहीं की जा सकी है। इसी कारण मामले की सुनवाई निर्धारित गति से आगे नहीं बढ़ पाई। जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में दावा किया है कि उसने पेपर लीक की पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया है। सीबीआई के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों से लेकर बिचौलियों, नेटवर्क संचालकों और लाभ पाने वाले अभ्यर्थियों तक पूरी कड़ी की पहचान कर ली गई है। एजेंसी का कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य जुटाए गए हैं। चार्जशीट के मुताबिक, मामले को साबित करने के लिए 360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए जाएंगे। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। मामले में हाल ही में नियुक्त विशेष लोक अभियोजक वी.के. पाठक और अर्जुन आनंद सीबीआई की ओर से अदालत में पक्ष रखेंगे। जांच के दौरान सीबीआई ने देशभर में बड़े स्तर पर कार्रवाई की। एजेंसी ने 72 अधिकारियों और कर्मचारियों की कई विशेष टीमें गठित कीं, जिनके साथ आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों को भी जोड़ा गया। दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा समेत कई राज्यों में 92 ठिकानों पर छापेमारी कर डिजिटल उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। इसके अलावा जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े कई बैंक खाते, लॉकर और एक डीमैट खाता भी फ्रीज किया गया है। सीबीआई का दावा है कि डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया गया है। हालांकि, चार्जशीट में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के किसी अधिकारी या अन्य सरकारी अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया गया है। अब सभी की नजर 3 अगस्त की अगली सुनवाई पर टिकी है, जब यह स्पष्ट होगा कि सीबीआई अदालत के निर्देशानुसार सभी जरूरी दस्तावेज पेश कर पाती है या नहीं। फास्ट ट्रैक कोर्ट में लंबित यह मामला देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता की कसौटी भी माना जा रहा है।