नैनीताल:1994 रामपुर तिराहा कांड की उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी,फैसला सुरक्षित

Nainital: Hearing of 1994 Rampur Tiraha incident completed in Uttarakhand High Court, decision reserved

नैनीताल, 10 मार्च: उत्तराखंड राज्य आंदोलन से जुड़े बहुचर्चित रामपुर तिराहा कांड मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से उन छह मुकदमों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी मांगी, जो इस प्रकरण में दर्ज किए गए थे। अदालत ने यह भी पूछा कि ये मामले किस अदालत में लंबित हैं और उनकी सुनवाई की स्थिति क्या है। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मुख्य आरोपी रहे तत्कालीन मुजफ्फरनगर जिलाधिकारी अनंत कुमार सिंह से संबंधित मामले की वर्तमान स्थिति के बारे में उनके पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
वहीं याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि मुकदमे दर्ज होने के बाद से अब तक इन मामलों में प्रभावी सुनवाई नहीं हो सकी है। करीब 30 वर्ष बीत जाने के बाद भी इन मामलों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। बताया गया कि छह मामलों को जिला जज ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के एक पत्र के आधार पर सुनवाई के लिए मुजफ्फरनगर की अदालत में स्थानांतरित कर दिया था, जिसके बाद से इन पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हो पाई।
राज्य आंदोलनकारी और अधिवक्ता रमन शाह ने बताया कि इस घटना में सात महिला आंदोलनकारियों के साथ दुष्कर्म किया गया था, जबकि 17 अन्य महिलाओं को प्रताड़ित किया गया था। इस मामले में मुख्य आरोपी तत्कालीन जिलाधिकारी अनंत कुमार सिंह समेत सात अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को सीबीआई द्वारा मुजफ्फरनगर अदालत में स्थानांतरित किया गया था, जहां अब तक सुनवाई लंबित है।
गौरतलब है कि राज्य आंदोलनकारियों की सुप्रीम कोर्ट में अपील के बाद यह मामला नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया था।
दरअसल, 2 अक्टूबर 1994 को पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में पुलिस ने रोक लिया था। इस दौरान पुलिस द्वारा कथित रूप से अत्याचार किए गए, जिसमें महिला आंदोलनकारियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं सामने आईं और सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी। हालांकि, मुख्य आरोपी अनंत कुमार सिंह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति राज्यपाल से न मिलने के कारण उन्हें राहत मिल गई थी। सीबीआई ने इस प्रकरण में हत्या, घातक हथियारों के इस्तेमाल और फायरिंग से गंभीर चोट पहुंचाने समेत कई धाराओं में मुकदमे दर्ज किए थे। विभिन्न कारणों से इन मामलों की सुनवाई वर्षों से लंबित रही है।कोर्ट में हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता, राज्य सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और सीबीआई के पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।