आत्मनिर्भर गांव बनाने की दिशा में बड़ा कदम: पंचायतों के लिए खुला खजाना, 'प्रधान-पति' परंपरा पर भी कसेगा शिकंजा
देश की ग्रामीण व्यवस्था को मजबूत करने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त आयोग द्वारा इस बार पंचायतों को 4.35 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड अनुदान दिया गया है, जो पिछली बार के 2.36 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग दोगुना है। इस फैसले से देशभर की ग्राम पंचायतों, जिला परिषदों और ग्रामीण निकायों को विकास कार्यों में नई गति मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के विजन से प्रेरित है और इसका उद्देश्य गांवों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर वित्तीय सहायता मिलने से पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और वे अपने स्तर पर विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर सकेंगी। इस अनुदान में से 87 हजार करोड़ रुपये विशेष रूप से पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए निर्धारित किए गए हैं। सचिव के अनुसार, यदि कोई ग्राम पंचायत या जिला परिषद अपनी आय में कम से कम 2.5 प्रतिशत की वृद्धि करती है, तो उसे अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। इससे पंचायतों को खुद के संसाधन विकसित करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। देश में पंचायत व्यवस्था में महिला भागीदारी भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। वर्तमान में लगभग 25 लाख पंचायत प्रतिनिधियों में से करीब 14 लाख महिलाएं हैं। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में अब भी ‘प्रधान-पति’ जैसी प्रवृत्तियां देखने को मिलती हैं। इस पर रोक लगाने और महिलाओं को वास्तविक अधिकार दिलाने के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर राज्यों को आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए जाएंगे। वहीं, पंचायतों की कार्यक्षमता में क्षेत्रीय असमानता भी सामने आई है। दक्षिण भारत के कई राज्य आय सृजन के मामले में आगे हैं। उदाहरण के तौर पर आंध्र प्रदेश ने संपत्ति कर के माध्यम से 1000 करोड़ रुपये से अधिक की आय अर्जित की है, जबकि कर्नाटक ने करीब 1,350 करोड़ रुपये जुटाए हैं। भारद्वाज ने कहा कि पंचायतों में आय सृजन को राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि विकास का प्रमुख आधार समझना होगा। इसके लिए जनभागीदारी और जागरूकता बेहद जरूरी है। डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में भी सरकार ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। देश की 2.55 लाख ग्राम पंचायतें ‘ई-ग्राम स्वराज’ पोर्टल से जुड़ चुकी हैं, जहां योजनाओं, खर्च, लेखा और ऑडिट की पूरी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसके अलावा ‘मेरी पंचायत’ मोबाइल एप के माध्यम से आम नागरिक भी विकास कार्यों और खर्चों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इस एप को अब तक एक करोड़ से अधिक लोग डाउनलोड कर चुके हैं। इसके साथ ही स्वामित्व योजना के तहत 3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। सर्वे के बाद तैयार नक्शों को राज्यों को सौंप दिया गया है और दावा-आपत्ति प्रक्रिया के बाद ग्रामीणों को उनकी संपत्ति पर कानूनी अधिकार सुनिश्चित किए जाएंगे। यह ऐतिहासिक अनुदान न केवल पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत करेगा, बल्कि गांवों के समग्र विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी नई दिशा देगा।