महिला आरक्षण के रण में उतरेंगी विधानसभाएं: हरियाणा और एमपी में 27 को महासंग्राम, विपक्षी किलों को घेरने की तैयारी
चंडीगढ़। संसद की दहलीज पार करने के बाद अब 'महिला आरक्षण विधेयक' की गूंज राज्यों की विधानसभाओं में सुनाई देगी। भाजपा शासित राज्यों ने इस ऐतिहासिक विधेयक पर विपक्ष को घेरने और महिला सशक्तिकरण का संदेश जन-जन तक पहुँचाने के लिए बिसात बिछा दी है। हरियाणा और मध्य प्रदेश में आगामी 27 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जहाँ नारी शक्ति के राजनीतिक भविष्य और विपक्ष के रुख पर तीखी बहस होना तय है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह सत्र केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा। हरियाणा और मध्य प्रदेश के बाद 28 अप्रैल को उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र संभावित है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी 30 अप्रैल को सदन की बैठक बुलाई है। इन विशेष सत्रों का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण की राह में 'रोड़े अटकाने' वाली ताकतों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करना और केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करना है। इन सत्रों के दौरान भाजपा का सीधा प्रहार कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर होगा। भाजपा जहां इसे 'ऐतिहासिक सुधार' के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, आरक्षण के भीतर ओबीसी कोटे की मांग को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने मुख्य चुनौती समाजवादी पार्टी होगी, जो पूर्व में भी आरक्षण के स्वरूप पर सवाल उठाती रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महायुति (भाजपा, शिवसेना, एनसीपी) की ओर से इस मुद्दे पर एक करोड़ महिलाओं के हस्ताक्षर जुटाने का महा-अभियान शुरू किया है। यहाँ नेता प्रतिपक्ष ने राजनीतिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए पहले ही विशेष सत्र की मांग कर दी है। अगले हफ्ते यहाँ भी विशेष सत्र बुलाए जाने की पूरी उम्मीद है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा ने 22 सितंबर 2022 को एक अनूठी मिसाल पेश की थी, जब केवल महिला विधायकों के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया था। इस बार भी 30 अप्रैल का सत्र हंगामेदार रहने के आसार हैं। सदन के भीतर चल रही इस बहस को भाजपा सड़क पर भी ले जा रही है। देशभर में 'जनाक्रोश रैलियों' के माध्यम से भाजपा विपक्षी दलों को 'महिला विरोधी' करार देने की मुहिम चला रही है। रणनीति साफ है आगामी चुनावों से पहले महिलाओं को एक बड़े वोट बैंक के रूप में एकजुट करना और विपक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में लाना। अगला हफ्ता भारतीय राजनीति के लिए बेहद अहम होने वाला है, क्योंकि देश की आधी आबादी के अधिकारों पर होने वाली यह बहस विधानसभाओं के जरिए गाँव-गाँव की चौपालों तक पहुँचेगी।