नगरासू गुरुद्वारा विवाद का हुआ पटाक्षेपः पंजाब से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल की मध्यस्थता रंग लाई! चौथे दिन नीचे उतरे निहंग, पुलिस-प्रशासन ने ली राहत की सांस
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नगरासू गुरुद्वारे में पिछले कई दिनों से चल रहा हाई-वोल्टेज विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। गुरुद्वारे की छत पर डटे पांचों निहंग सिख पंजाब से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल की समझाइश के बाद नीचे उतर आए। इसके साथ ही करीब 27 घंटे से अधिक समय तक चला तनावपूर्ण गतिरोध खत्म हो गया और पुलिस-प्रशासन ने राहत की सांस ली। गुरुद्वारे में चल रहे इस विवाद ने न केवल स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी, बल्कि पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए थे। हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। वहीं, किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों को भी तैनात किया गया था। जानकारी के अनुसार 20 जून की शाम निहंग सिखों का एक दल नगरासू गुरुद्वारे पहुंचा था। वहां किसी बात को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण बन गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को मौके पर बुलाया गया, लेकिन पुलिस के पहुंचते ही कुछ निहंग सिख गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और वहीं डेरा जमा लिया। बताया जाता है कि इस दौरान दो सेवादारों को भी कुछ समय के लिए बंधक बना लिया गया था। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया, लेकिन निहंग सिख छत पर डटे रहे और प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद नीचे उतरने को तैयार नहीं हुए।
प्रशासन की लगातार कोशिशें रहीं जारी
विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने लगातार वार्ता का प्रयास किया। अधिकारियों द्वारा कई दौर की बातचीत की गई। इस दौरान दो निहंग सिख प्रशासन की समझाइश के बाद नीचे उतर आए और उन्होंने प्रशासन से माफी भी मांगी। बाद में उन्हें उनके घर भेज दिया गया। इसके बाद भी कुछ निहंग सिख छत पर बने रहे। बीते दिन दो निहंग भोजन लेने नीचे आए थे, जिनमें से एक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बावजूद पांच निहंग सिख गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर डटे रहे, जिससे तनाव की स्थिति बनी रही। मामले को सुलझाने के लिए सोमवार को पंजाब से निहंग सिखों का एक प्रतिनिधिमंडल नगरासू गुरुद्वारा पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने छत पर मौजूद निहंग सिखों से विस्तृत बातचीत की और उन्हें शांतिपूर्वक नीचे उतरने के लिए समझाया। काफी देर तक चली वार्ता के बाद सकारात्मक परिणाम सामने आए और पांचों निहंग सिख नीचे उतरने पर सहमत हो गए। जैसे ही सभी निहंग छत से नीचे आए, वहां मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली। इसके साथ ही कई दिनों से चला आ रहा तनाव भी काफी हद तक समाप्त हो गया।
कर्णप्रयाग विवाद से जुड़ा है पूरा मामला
नगरासू गुरुद्वारा विवाद की जड़ें कर्णप्रयाग में हुई एक घटना से जुड़ी बताई जा रही हैं। दरअसल 16 जून को हेमकुंड साहिब से लौट रहे कुछ निहंग सिखों का कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों के साथ विवाद हो गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद बढ़ते-बढ़ते मारपीट तक पहुंच गया। इसी दौरान एक निहंग सिख द्वारा तलवार चलाने की भी बात सामने आई, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन निहंग सिखों को गिरफ्तार कर लिया था। इसी गिरफ्तारी के विरोध में नगरासू गुरुद्वारे में मौजूद निहंग सिख आंदोलनरत थे। उनकी मांग थी कि गिरफ्तार निहंग सिखों को रिहा किया जाए। इसी मांग को लेकर उन्होंने गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल और छत पर कब्जा जमाए रखा था।
राजनीतिक स्तर तक पहुंचा था मामला
नगरासू गुरुद्वारा विवाद केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मामला राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंच गया। जानकारी के अनुसार पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस मुद्दे पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बातचीत की थी। दोनों राज्यों के बीच संवाद स्थापित होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी समाधान निकालने की कोशिशें तेज हुईं। आखिरकार पंजाब से आए प्रतिनिधिमंडल की मध्यस्थता और प्रशासन की संयमित रणनीति के चलते विवाद शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया।