पहाड़ों पर आफत की बारिश: किमाणा गांव में देर रात घुसा मलबा और पानी, दहशत में रातभर जागते रहे ग्रामीण

Torrential rains wreak havoc in the mountains: Debris and water entered Kimana village late at night; villagers stayed awake all night in panic.

रुद्रप्रयाग। पर्वतीय इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश आफत का सबब बनी हुई है। विकासखंड के किमाणा गांव में देर रात हुई भारी बारिश के दौरान अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में पानी और मलबा बहकर सीधे बस्ती में घुस गया। इस अचानक आई आफत से पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीणों को खौफ के साए में रातभर जागकर पहरेदारी करने को मजबूर होना पड़ा।

लगातार हो रही भारी बारिश ने पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विकासखंड के किमाणा गांव में देर रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद पहाड़ी से अचानक पानी और मलबा आने से पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। संभावित खतरे को देखते हुए ग्रामीण पूरी रात जागकर पहरेदारी करते रहे। हर किसी के मन में इस बात का डर था कि कहीं भूस्खलन और तेज न हो जाए। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कई दिनों से गांव के ऊपरी हिस्से से लगातार मलबा और पानी बहकर बस्ती की ओर आ रहा है। देर रात हुई तेज बारिश के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। पहाड़ी से भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा बहकर गांव तक पहुंच गया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। कई परिवार पूरी रात अपने घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की तलाश में जुटे रहे। इससे पहले हुई बारिश में भी बड़ी मात्रा में गाद और मलबा गांव के रास्तों, खेतों और घरों के आसपास जमा हो चुका है। इससे ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। खेतों में फसलें नुकसान की चपेट में हैं, जबकि कई संपर्क मार्ग भी बाधित हो गए हैं। लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण गांव पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है और लोगों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। प्रशासन ने भी हालात की गंभीरता को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है। एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि पहाड़ी से आ रहे पानी और मलबे के कारण कृषि भूमि को काफी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा कुछ गौशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रभावित परिवारों के लिए तिरपाल की व्यवस्था कर दी गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ठहराया जा सके। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और स्थानीय अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव की सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए गए तो लगातार हो रही बारिश के बीच गांव में बड़ा हादसा हो सकता है। मानसून के इस दौर में किमाणा गांव के हालात एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती को सामने ला रहे हैं। फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें मौसम और प्रशासन, दोनों पर टिकी हुई हैं।