नैनीताल:ये अमृतकाल है या पैदलकाल? 78 साल बाद भी सड़क को तरसा गांव, ग्रामीण बोले,सड़क दो या वोट भूल जाओ!

Nainital: Is this the Amritkaal (nectar period) or the Pedestriankaal? Even after 78 years, the village still yearns for a road. The villagers say, "Give us the road or forget about our votes!"

नैनीताल। देश आजादी के 78 वर्ष पूरे होने और "विकसित भारत" तथा "अमृतकाल" के दावों के बीच आगे बढ़ रहा है, लेकिन उत्तराखंड के कई गांव आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के इंतजार में हैं। नैनीताल जिले की ग्राम पंचायत खुर्पाताल के अंतर्गत आने वाला बजून-फगुनिया खेत गांव इसकी एक बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है, जहां ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देने लगा है।

सड़क निर्माण की वर्षों पुरानी मांग पूरी न होने से नाराज ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे। गांव में अब एक ही आवाज गूंज रही है, "सड़क नहीं, तो वोट नहीं।"

ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 78 साल बाद भी उनका गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया है। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उन्हें करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर फगुनिया खेत पहुंचना पड़ता है। इसके बाद बजून से अधोड़ा तक लगभग छह किलोमीटर लंबी जर्जर सड़क पर सफर तय करने के बाद ही करीब 12 किलोमीटर दूर नैनीताल पहुंचा जा सकता है।

सड़क न होने की सबसे बड़ी कीमत गांव के बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं चुका रहे हैं। स्कूली बच्चों को हर दिन लंबी पैदल दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति में मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को आज भी डोली के सहारे जंगल और पहाड़ी रास्तों से मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। सवाल यह है कि जब देश चांद और अंतरिक्ष की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, तब क्या पहाड़ के इन गांवों तक सड़क पहुंचाना अब भी सबसे कठिन मिशन बना हुआ है?

गांव के अधिकांश लोग फल और सब्जी उत्पादन पर निर्भर हैं, लेकिन सड़क न होने से उनकी उपज समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पाती। परिवहन लागत बढ़ने से किसानों की आमदनी भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर चुनाव में सड़क का वादा किया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही फाइलें भी मानो पहाड़ों में कहीं गुम हो जाती हैं।

सड़क सुविधा के अभाव में गांव से लगातार पलायन हो रहा है। कभी करीब 2,500 से अधिक आबादी वाले इस क्षेत्र में अब केवल लगभग 60 लोग ही बचे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क बन जाती तो शायद गांव आज भी आबाद होता।

इस मामले में नैनीताल विधायक सरिता आर्या का कहना है कि फगुनिया खेत और जमीर क्षेत्र के लिए सड़क निर्माण का प्रस्ताव कई बार शासन को भेजा जा चुका है। हालांकि क्षेत्र में बांज के जंगल होने के कारण वन विभाग से अनुमति नहीं मिल पाने से कार्य आगे नहीं बढ़ सका है। उन्होंने कहा कि सरकार सड़क निर्माण के लिए लगातार प्रयास कर रही है और इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सभी को विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

फिलहाल गांव के लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उनकी सड़क पहले बनेगी या फिर एक और चुनावी वादा? क्योंकि इंतजार करते-करते गांव की आबादी तो लगभग खत्म हो चुकी है, अब कहीं भरोसा भी पलायन न कर जाए।