मानसून सत्र: संसद में आज संग्राम के आसार! सरकार 4 अहम बिल पास कराने की तैयारी में, राम मंदिर दान विवाद और छात्र प्रदर्शन पर अड़ा विपक्ष
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में सरकार और विपक्ष के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है। सत्र समाप्त होने में अब केवल नौ कार्यदिवस बचे हैं, और सोमवार को केंद्र सरकार चार बड़े और दूरगामी विधेयकों को संसद के पटल पर आगे बढ़ाने की पूरी तैयारी में है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस समेत प्रमुख विपक्षी दलों ने राम मंदिर दान विवाद और दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर सरकार को चौतरफा घेरने की आक्रामक रणनीति तैयार कर ली है।
संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के संकेत हैं। सत्र समाप्त होने में अब केवल नौ कार्यदिवस शेष हैं। ऐसे में केंद्र सरकार सोमवार को चार महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस समेत विपक्षी दल राम मंदिर दान विवाद और दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाए हुए हैं। ऐसे हालात में संसद की कार्यवाही एक बार फिर हंगामेदार रहने के आसार हैं। सरकार का कहना है कि 13 अगस्त को सत्र समाप्त होने से पहले सभी प्रमुख विधायी कार्य पूरे किए जाएंगे। इसी क्रम में पहला अहम विधेयक सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है। सरकार का तर्क है कि इससे वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और न्यायिक व्यवस्था पर बढ़ते बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। दूसरा महत्वपूर्ण विधेयक एमएसएमई संशोधन विधेयक है। इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को मजबूती देना तथा बकाया भुगतान में होने वाली देरी पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना है। उद्योग जगत लंबे समय से इस तरह के कानूनी सुधारों की मांग करता रहा है। सरकार भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) विधेयक भी पेश करेगी, जिसके जरिए कोलकाता स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान को अधिक सशक्त वैधानिक ढांचा देने की तैयारी है। वहीं बैंकर बही साक्ष्य संशोधन विधेयक के माध्यम से डिजिटल बैंकिंग और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से जुड़े पुराने कानूनों को आधुनिक तकनीकी जरूरतों के अनुरूप बनाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। उधर, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष चर्चा में भाग लेने के बजाय लगातार हंगामा कर रहा है, जिससे संसद की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने सभी दलों से विधायी कार्यों को सुचारु रूप से पूरा कराने में सहयोग की अपील की। वहीं विपक्ष अपने रुख पर कायम है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सोमवार सुबह फ्लोर लीडर्स की बैठक कर आगे की रणनीति तय की। विपक्ष की प्रमुख मांगों में राम मंदिर दान विवाद की निष्पक्ष जांच और दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग शामिल है।इसी बीच सरकार विदेशी अंशदान विनियमन (एफसीआरए) संशोधन विधेयक भी ला सकती है। प्रस्तावित संशोधन के तहत एफसीआरए पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराने वाले संगठनों की संपत्तियों पर प्रशासनिक नियंत्रण का प्रावधान किया गया है। इस प्रस्ताव का तृणमूल कांग्रेस ने विरोध करते हुए इसे संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह भी सरकार ने विपक्ष के विरोध के बीच 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण देने वाला विधेयक और जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पारित कराया था। ऐसे में मानसून सत्र के शेष दिनों में सरकार के विधायी एजेंडे और विपक्ष के विरोध के बीच तीखी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सरकार अपने सभी विधेयक पारित कराने में सफल होगी या विपक्ष के हंगामे से संसद की कार्यवाही फिर बाधित होगी।