महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में नहीं बिकेंगे एनर्जी ड्रिंक! क्या एनर्जी ड्रिंक्स सच में बन रही हैं 'साइलेंट किलर'? बच्चों और युवाओं में बढ़ती लत ने बढ़ाई चिंता, लिंक में पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट

Major decision by the Maharashtra government: Energy drinks will not be sold within a 500-meter radius of schools! Are energy drinks truly becoming 'silent killers'? Growing addiction among children

नई दिल्ली। चमकदार विज्ञापन, रंग-बिरंगी बोतलें, "इंस्टेंट एनर्जी" का दावा और युवाओं के बीच बढ़ता क्रेज... लेकिन क्या एनर्जी ड्रिंक्स वास्तव में उतनी सुरक्षित हैं, जितना कंपनियां दावा करती हैं? यही सवाल अब सरकारों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सामने सबसे बड़ी चिंता बन चुका है। इसी चिंता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में 'Sting' एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर रोक लगाई जाएगी। सरकार का कहना है कि कम उम्र में एनर्जी ड्रिंक्स का बढ़ता सेवन बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। इसलिए स्कूलों के आसपास इनकी उपलब्धता सीमित करना जरूरी हो गया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री नरहरी झिरवाल ने विधानसभा में इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे और संबंधित विभागों को नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों और किशोरों में एनर्जी ड्रिंक पीने की बढ़ती प्रवृत्ति सरकार के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।

FSSAI की बड़ी कार्रवाई, छह प्रमुख कंपनियों को नोटिस
महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) भी एनर्जी ड्रिंक उद्योग पर सख्ती बरत रहा है। 1 जुलाई को FSSAI ने Red Bull, PepsiCo की Adrenaline Rush, Reliance की Campa Energy Gold Boost, Sting, Hell Energy और Coca-Cola समर्थित Monster Energy सहित छह प्रमुख ब्रांड्स को नोटिस जारी किया। नियामक संस्था का आरोप है कि कंपनियां अपने उत्पादों की भ्रामक ब्रांडिंग कर रही हैं और ऐसे दावे कर रही हैं जिनके समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक आधार उपलब्ध नहीं है। FSSAI ने स्पष्ट किया है कि भारत में फिलहाल "एनर्जी ड्रिंक" नाम की कोई आधिकारिक खाद्य श्रेणी निर्धारित नहीं है, फिर भी कंपनियां अपने उत्पादों को इसी नाम से बेच रही हैं। इसके अलावा "दिमाग और शरीर को ऊर्जा देता है", "फोकस बढ़ाता है", "कमजोरी दूर करता है", "एनर्जी लेवल बढ़ाता है" जैसे दावों पर भी नियामक ने सवाल उठाए हैं। संस्था का कहना है कि खाद्य उत्पादों के लिए इस प्रकार के वैज्ञानिक दावे मौजूदा नियमों के अनुरूप नहीं हैं।

आखिर इतनी लोकप्रिय क्यों हो गई हैं एनर्जी ड्रिंक्स?
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में हर व्यक्ति तुरंत ऊर्जा चाहता है। देर रात तक पढ़ाई करने वाले छात्र, लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारी, जिम जाने वाले युवा और गेमिंग करने वाले किशोर बड़ी संख्या में एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन कर रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि ये पेय तुरंत थकान दूर कर देते हैं और शरीर को ऊर्जा से भर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह ऊर्जा प्राकृतिक नहीं बल्कि कैफीन और अत्यधिक शुगर के कारण मिलने वाला अस्थायी प्रभाव होती है। कुछ घंटों बाद शरीर पहले से अधिक थका हुआ महसूस कर सकता है और लगातार सेवन करने पर इसकी आदत भी पड़ सकती है।

क्या सचमुच एनर्जी देती हैं ये ड्रिंक्स?
विशेषज्ञ बताते हैं कि एनर्जी ड्रिंक्स शरीर को वास्तविक पोषण नहीं देतीं। इनमें मौजूद कैफीन मस्तिष्क को कुछ समय के लिए सतर्क जरूर बनाती है, लेकिन शरीर की ऊर्जा का स्तर वास्तव में नहीं बढ़ता। इसी तरह अत्यधिक चीनी कुछ समय के लिए ब्लड शुगर बढ़ाती है, जिससे व्यक्ति खुद को ऊर्जावान महसूस करता है, लेकिन कुछ देर बाद ऊर्जा का स्तर तेजी से गिर जाता है। यानी यह "इंस्टेंट एनर्जी" वास्तव में शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा नहीं बल्कि रासायनिक उत्तेजना का परिणाम होती है।

वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं?
PUBMed में प्रकाशित कई अंतरराष्ट्रीय शोधों में एनर्जी ड्रिंक्स के गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों का उल्लेख किया गया है। शोध बताते हैं कि इन ड्रिंक्स के अधिक सेवन से हाई ब्लड प्रेशर, साइनस टैकीकार्डिया (दिल की धड़कन का असामान्य रूप से तेज होना), बेचैनी और घबराहट, अनिद्रा, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, दांतों का क्षरण जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। एक अन्य शोध में बताया गया कि अत्यधिक सेवन से डिहाइड्रेशन, पेट संबंधी विकार, एक्यूट किडनी इंजरी, वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन, दौरे पड़ना, स्ट्रोक, एक्यूट मेनिया जैसी गंभीर स्थितियां भी विकसित हो सकती हैं। कुछ मामलों में अत्यधिक सेवन के बाद मृत्यु तक होने की घटनाओं का भी उल्लेख शोधों में किया गया है।

बच्चे और किशोर सबसे ज्यादा जोखिम में
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे अधिक चिंता बच्चों और किशोरों को लेकर है। नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि किशोर प्रतिदिन औसतन लगभग 61 मिलीग्राम कैफीन का सेवन करते हैं और इसमें एनर्जी ड्रिंक्स की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। स्कूल और कॉलेज के छात्रों में इन्हें फैशन, दोस्तों के प्रभाव और पढ़ाई के दौरान जागे रहने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कम उम्र में अधिक कैफीन का सेवन मस्तिष्क के विकास, नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है।

एनर्जी ड्रिंक्स के छह बड़े नुकसान
1. हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी जोखिम:
एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन की मात्रा काफी अधिक होती है। इसका अधिक सेवन रक्तचाप बढ़ा सकता है और दिल की धड़कन अनियमित कर सकता है।
2. टाइप-2 डायबिटीज और मोटापा: इनमें अत्यधिक मात्रा में चीनी होती है। नियमित सेवन से वजन तेजी से बढ़ सकता है और लंबे समय में मधुमेह का खतरा भी बढ़ जाता है।
3. तनाव, घबराहट और अनिद्रा: अत्यधिक कैफीन दिमाग को उत्तेजित करती है, जिससे चिंता, घबराहट, चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या हो सकती है।
4. दांतों को नुकसान: एनर्जी ड्रिंक्स में मौजूद चीनी और एसिड दांतों के इनामेल को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैविटी और संवेदनशीलता बढ़ती है।
5. डिहाइड्रेशन और किडनी पर असर: यदि इन्हें पानी की जगह नियमित रूप से पिया जाए तो शरीर में पानी की कमी हो सकती है। अधिक कैफीन किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
6. कैफीन की लत: लगातार सेवन करने वालों को धीरे-धीरे इसकी आदत पड़ सकती है। कई लोगों को बिना एनर्जी ड्रिंक के काम करने या व्यायाम करने में कठिनाई महसूस होने लगती है।

क्या सभी एनर्जी ड्रिंक्स खतरनाक हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी खाद्य या पेय पदार्थ का प्रभाव उसकी मात्रा, सेवन की आवृत्ति और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। लेकिन बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों के लिए अधिक कैफीन वाले एनर्जी ड्रिंक्स विशेष चिंता का विषय हो सकते हैं। इसलिए इनका सेवन सीमित रखना और बिना चिकित्सकीय सलाह के नियमित उपयोग से बचना बेहतर माना जाता है।

क्या दूसरे राज्यों में भी लग सकती है रोक?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महाराष्ट्र सरकार का यह कदम प्रभावी साबित होता है तो भविष्य में अन्य राज्य भी स्कूलों के आसपास एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री को लेकर इसी तरह के नियम बना सकते हैं। FSSAI की मौजूदा कार्रवाई भी संकेत देती है कि आने वाले समय में इन उत्पादों के विज्ञापन, लेबलिंग और स्वास्थ्य संबंधी दावों पर और कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं।