उत्तराखंड: सरकार का बड़ा फैसला! ऊर्जा निगमों की सेवाएं 6 महीने के लिए आवश्यक सेवा घोषित, अधिकारियों और कर्मचारियों की हड़ताल पर तत्काल रोक

Uttarakhand: Major government decision! Services of energy corporations declared 'essential services' for six months; immediate ban on strikes by officers and employees.

देहरादून। उत्तराखंड में विद्युत आपूर्ति और ऊर्जा सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। शासन ने प्रदेश के तीनों ऊर्जा निगमों ‘उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल), उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) और पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल)’ की सेवाओं को छह महीने की अवधि के लिए आवश्यक सेवा घोषित कर दिया है। इसके साथ ही इन निगमों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सभी श्रेणियों में हड़ताल पर तत्काल प्रभाव से छह महीने के लिए रोक लगा दी गई है। शासन की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि प्रदेश में निर्बाध विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण व्यवस्था बनाए रखना लोकहित में बेहद आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम के तहत यह कदम उठाया है। सरकार का कहना है कि बिजली आपूर्ति जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं में किसी भी तरह का व्यवधान आम जनता के साथ-साथ उद्योग, व्यापार और घरेलू उपभोक्ताओं को प्रभावित कर सकता है। शासन के आदेश का असर उत्तराखंड के तीनों प्रमुख ऊर्जा निगमों पर होगा। यूजेवीएनएल के जिम्मे मुख्य रूप से विद्युत उत्पादन, यूपीसीएल के जिम्मे विद्युत वितरण और पिटकुल के जिम्मे विद्युत पारेषण व्यवस्था है। ऐसे में इन तीनों निगमों की सेवाओं को आवश्यक सेवा घोषित किए जाने से बिजली व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हड़ताल का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है। प्रमुख सचिव ऊर्जा आर. मीनाक्षी सुंदरम की ओर से जारी आदेश में निर्बाध विद्युत व्यवस्था को जनहित से सीधे जुड़ा विषय बताया गया है। सरकार का मानना है कि बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण की श्रृंखला में किसी एक स्तर पर भी व्यापक व्यवधान आने से पूरे प्रदेश में विद्युत आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए छह महीने की अवधि के लिए हड़ताल पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

पहले ही प्रदेश में लागू है एस्मा
गौरतलब है कि राज्य सरकार इससे पहले ही प्रदेश में कर्मचारियों की हड़ताल पर छह महीने के लिए रोक लगा चुकी है। 30 जुलाई को कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद उत्तराखंड में एस्मा (आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम) लागू किया गया था। इसके तहत राज्य कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल नहीं कर सकते हैं। सरकार ने उत्तर प्रदेश अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम, 1966 की धारा 3 की उपधारा (1) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह निर्णय लिया था। अब ऊर्जा निगमों की सेवाओं को भी आवश्यक सेवा के दायरे में लाने से बिजली क्षेत्र में हड़ताल पर रोक को और स्पष्ट रूप से लागू कर दिया गया है।