हल्द्वानीः मदरसन फैक्ट्री विवाद की जांच तेज! शिकायतकर्ता पीयूष जोशी ने जांच अधिकारी को सौंपे वीडियो व तकनीकी साक्ष्य

Haldwani: Investigation into the Madrasan factory dispute intensifies! Complainant Piyush Joshi submits video and technical evidence to the investigating officer.

हल्द्वानी। मदरसन फैक्ट्री विवाद और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच अब मामले की जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। एसएसपी नैनीताल के निर्देश पर गठित उच्च स्तरीय जांच समिति के समक्ष शिकायतकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता पीयूष जोशी ने पुलिस अधीक्षक अपराध एवं यातायात के सामने अपने विस्तृत बयान दर्ज कराए। इस दौरान उन्होंने मामले से जुड़े कई अहम दस्तावेज और तकनीकी साक्ष्य जांच अधिकारी को सौंपे, जिनके आधार पर अब पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार पीयूष जोशी ने पांच पन्नों का विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत करते हुए पेन ड्राइव में वीडियो फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, हल्दूचौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मेडिकल रिपोर्ट तथा डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल की डिस्चार्ज समरी जांच अधिकारी को उपलब्ध कराई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उक्त साक्ष्य घटनास्थल पर हुई पूरी घटना और उसके बाद की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त हैं। अपने बयान में पीयूष जोशी ने आरोप लगाया कि घटना के दिन वह मदरसन कंपनी के बाहर केवल शांतिपूर्ण मध्यस्थता और श्रमिकों के हितों को लेकर बातचीत कर रहे थे।

उनका कहना है कि इसी दौरान कथित रूप से पूर्व नियोजित तरीके से कोतवाल हरपाल सिंह ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उनका गला दबाने का प्रयास किया। जोशी ने दावा किया कि इस कथित घटना के वीडियो फुटेज भी जांच अधिकारी को सौंपे गए हैं। उन्होंने अपने बयान में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश बनाम कांशीराम (2009) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की श्वास नली दबाना गंभीर आपराधिक कृत्य है और इसे हत्या के प्रयास की श्रेणी में माना जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 और 61(2) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की है। पीयूष जोशी ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए और उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा। साथ ही उन्होंने साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने की मांग उठाई है। फिलहाल, इस मामले में जहां शिकायतकर्ता पीयूष जोशी अपने आरोपों पर अडिग हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन निष्पक्ष जांच का भरोसा दिला रहा है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।