Good Morning India: भारत-चीन पर लागू होगा 100% टैरिफ? US हाउस में पास हुआ रूस पर प्रतिबंध बिल! पीएम मोदी का 76वां जन्मदिन आज, BJP करेगी संकल्प सेवा अभियान की शुरुआत! 41वें दिन भी बॉक्स ऑफिस पर दिखा हनुमान अंश का कमाल! लिंक में पढ़ें प्रमुख खबरें
नमस्कार दोस्तों, आवाज इंडिया अपना खास कॉलम ‘गुड मॉर्निंग इंडिया’ लेकर एक फिर आपके समक्ष प्रस्तुत है। आईए आज के प्रमुख कार्यक्रमों पर नजर डालते हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य पर भाजपा देशभर में सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत करेगी। वहीं आज भारत के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की दिशा में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन होगा।
अब बड़ी खबरों की तरफ रुख करते हैं, आज 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है और दुनियाभर से उन्हें बधाइयों का तांता लगा हुआ है। साथ ही आज देश के कई इलाकों में तरह तरह के प्रोग्राम आयोजित किये जा रहे हैं। बीजेपी और केंद्रीय मंत्रियों ने आज पीएम मोदी को उनकी पच्चीस साल की सार्वजनिक सेवा के लिए आशीर्वाद देने के लिए दीया जलाने का आह्वान किया है। आज से लेकर 17 अक्टूबर तक बीजेपी संकल्प सेवा अभियान की शुरुआत कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज खुद दिल्ली में रहेंगे। पीएम मोदी दिल्ली में SEMICON India 2026 का उद्घाटन करेंगे और इस मौके पर प्रधानमंत्री कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगे। मध्य प्रदेश में आज उज्जैन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के मौके पर दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान उज्जैन के शिप्रा घाटों को 25 लाख से अधिक दीयों से रोशन किया जाएगा जिसमें 30 हजार के करीब वालंटियर शामिल होंगे। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने PM मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर पर होने कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी थी।
इधर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर भारत पर टैरिफ बम फोड़ सकते हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में वो बिल पास हो गया है जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इस बिल के पास होने के बाद अब राष्ट्रपति ट्रंप को रूस पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार मिल गया है। इसके साथ ही रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर भारी टैरिफ लगाने का हक भी मिला है। यह कानून अमेरिका को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की इजाजत देता है जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं। US हाउस में हुई बहस में भारत और चीन को खास तौर पर उन बड़े खरीदारों के तौर पर पहचाना गया है जिन पर इस प्रावधान का असर पड़ सकता है।
उधर नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी 'हनुमान अंश' इस साल के सबसे बड़े सरप्राइज में से एक है। 2 करोड़ के मामूली बजट में बनी ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अब कई बड़ी और बिग बजट फिल्मों को पीछे छोड़ती नजर आ रही है। 'हनुमान अंश' को रिलीज हुए 41 दिन हो चुके हैं और अब भी ये रुकने का नाम नहीं ले रही है। वीकेंड ही नहीं वर्किंग डेज पर भी ये पीछे हटने का नाम नहीं ले रही है। शोभिनव सत्य स्टारर इस फिल्म की कहानी नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित है। फिल्म 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और अब बॉक्स ऑफिस पर ये 41 दिन पूरे कर चुकी है। सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार, 41वें दिन फिल्म ने 4.08 करोड़ का कलेक्शन किया है।
इधर ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई मर्चेंट पेमेंट्स पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले पर सरकार ने अपना रुख पूरी तरह सख्त कर लिया है। व्यापारियों, दुकानदारों और राजनीतिक दलों के भारी विरोध के बावजूद, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस नीतिगत फैसले को वापस लेने या इस पर पुनर्विचार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। बुधवार को एक शीर्ष सरकारी अधिकारी से जब पूछा गया कि क्या सरकार ₹2000 से ऊपर के मर्चेंट पेमेंट्स पर प्रस्तावित MDR चार्ज को वापस लेने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने दो-टूक जवाब दिया। अधिकारी ने कहा कि यह निर्णय पूरे यूपीआई इकोसिस्टम के व्यापक हित में लिया गया है और इसे बदलने की कोई संभावना नहीं है। विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, द्वारा लगाए गए अमेरिकी दबाव के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार ने कहा कि नए MDR फ्रेमवर्क से यूपीआई आत्मनिर्भर, वित्तीय रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित बनेगा। वित्त संबंधी संसद की स्थायी समिति (32वीं रिपोर्ट) ने चेतावनी दी थी कि जीरो-MDR व्यवस्था से सरकारी खजाने पर भारी दबाव पड़ रहा है। समिति ने बताया कि ज़ीरो-MDR नीति को चालू रखने के लिए सरकार को हर साल लगभग ₹2,000 करोड़ की बजटीय सहायता देनी पड़ रही थी। संसदीय पैनल ने जोर देकर कहा था कि सरकारी खजाने पर निर्भर रहने के बजाय एक टिकाऊ राजस्व मॉडल बनाना यूपीआई के लॉन्ग टर्म भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
उधर भारत सरकार ने मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्ती दिखाते हुए कहा है कि यह एक साधारण मध्यस्थ नहीं रहा है, बल्कि सर्विस प्रोवाइडर है। मार्क जुकरबर्ग की कंपनी के पास प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले कंटेंट का पूरा कंट्रोल रहता है। इसके सोशल मीडिया के एल्गोरिदम से यह तय होता है कि कौन सा कंटेंट देखा जाना चाहिए और कौन सा नहीं। ऐसे में कंपनी की कंटेंट को लेकर पूरी जिम्मेदारी बनती है। हालांकि, बच्चों के आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर मेटा ने अपनी गलती मानी है और कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को भारतीय एजेंसी को रिपोर्ट किया जाएगा। कंपनी के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा कि हमारे प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा हमारे लिए प्राथमिकता है और हम सरकार के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि इन अपराधों को अंजाम देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए। इस नुकसान से निपटने के अपने प्रयासों को सामूहिक रूप से मजबूत करने के लिए, मेटा अब बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सीधे I4C द्वारा संचालित साइबर क्राइम पोर्टल पर करेगा।
इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन एक प्रस्तावित सैन्य समझौते के अंतर्गत इजरायल को 2 हजार पाउंड वजन वाले बेहद ताकतवर बम देने की प्लानिंग बना रहा है। ये वही हथियार हैं, जिनकी सप्लाई पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने गाजा में भीषण तबाही और बड़े पैमाने पर जनहानि की आशंका के चलते रोक दी थी। दो अमेरिकी अफसरों ने नाम ना जाहिर करने की शर्त पर बीते मंगलवार को बताया कि 2.8 अरब डॉलर के इस पैकेज में 40 हजार बम देने की प्लानिंग है। हालांकि, इस प्लान को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। अमेरिकी कांग्रेस को इस डील के बारे में अनौपचारिक तौर पर सूचित कर दिया गया है। डील की ज्यादातर राशि Foreign Military Financing के माध्यम से चुकाई जानी है। दावा है कि Foreign Military Financing के तहत अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे इजरायल को दिए जाते हैं। इजरायल उसी राशि का प्रयोग अमेरिका से हथियार खरीदने के लिए करता है। गौरतलब है कि यह प्रस्तावित बिक्री इजरायल की मिलिट्री कैपेबिलिटीज को बढ़ाने के ट्रंप प्रशासन की तरफ से उठाए जा रहे कदमों की सीरीज में लेटेस्ट है। आर्म्स सेल्स प्लान की जानकारी सबसे पहले ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने अपनी खबर में दी है।
उधर चुनाव के समय राजनीतिक दलों की ओर से किए जाने वाले वादों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल 2022 की जनहित याचिका अब सुनवाई के लिए लिस्ट होगी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने बुधवार को वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने इस मामले को लिस्ट करने की मांग की। कोर्ट ने मामले को लिस्ट करने पर सहमति दे दी है। याचिका में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से चुनावी घोषणापत्र को लेकर नियम बनाने की मांग की गई है। साथ ही राजनीतिक दलों को घोषणापत्र में किए गए वादों के लिए जवाबदेह बनाने की मांग भी की गई है। याचिका में कहा गया है कि चुनावी घोषणापत्र किसी पार्टी की सरकार बनाने के बाद की योजना और उसके काम करने के तरीके की जानकारी देता है। ऐसे में राजनीतिक दलों को घोषणापत्र में किए गए जरूरी और सही वादों को पूरा करने के लिए जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग से यह भी मांग की है कि जो राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र के वादे पूरे नहीं करते, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके तहत चुनाव चिन्ह जब्त करने और पार्टी की मान्यता खत्म करने जैसे कदम उठाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक दलों को ऐसे बड़े वादे करने से बचना चाहिए, जिनसे सरकारी खजाने पर ज्यादा बोझ पड़े। हालांकि, याचिका में यह भी कहा गया है कि हर चुनावी वादा गलत नहीं होता। इसलिए चुनाव आयोग को इस बारे में साफ नियम बनाने चाहिए।
इधर आईएसआई समर्थित पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके नेटवर्क से जुड़े युवाओं को गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकी संगठन घोषित किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें UAPA की धारा 35(1)(a) का इस्तेमाल करते हुए SBN को अधिनियम की पहली अनुसूची में शामिल किया गया। बता दें कि शहजाद भट्टी पाकिस्तान का गैंगस्टर है और फिलहाल दुबई में रहता है। शहजाद भट्टी अब आतंकी गतिविधियों में भी शामिल हो रहा है। गृह मंत्रालय ने अपने ऑफिशियल X अकाउंट पर लिखा है, ''आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच को आगे बढ़ाते हुए गृह मंत्रालय ने 'शहज़ाद भट्टी नेटवर्क' को UAPA के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया है।'' इसमें आगे लिखा है, ''यह ग्रुप हथियारों, विस्फोटकों और नशीले पदार्थों की सीमा-पार तस्करी में शामिल है, साथ ही युवाओं और छोटे-मोटे अपराधियों को आतंकवाद की ओर उकसाता है। भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और सांप्रदायिक सद्भाव को निशाना बनाते हुए, यह सिंडिकेट नफरत फैलाने वाला डिजिटल कंटेंट भी पब्लिश करता था।''
उधर हैदराबाद के पास पेड्डा कंजरला गांव में बुधवार शाम को गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान एक झील में गिरकर 6 नाबालिग लड़कों की डूबने से मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे एक हॉस्टल में रहने वाले आठ लड़के विसर्जन के दौरान झील में गिर गए। इनमें से दो लड़के बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि छह अन्य डूब गए। पुलिस के अनुसार, झील में ढीली मिट्टी होने के कारण यह दुर्घटना हुई। पास में मौजूद एक पुलिस कांस्टेबल ने पीड़ितों को सीपीआर दिया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। झील एकांत जगह पर थी और आसपास कोई वयस्क नहीं था जो बच्चों को बचाने की कोशिश कर सकता।
अब उत्तराखण्ड की खबरों पर नजर डालते हैं, रूड़की में अपहरण के बाद छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में चार वर्ष बाद अदालत का फैसला आया है। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, अपर सत्र न्यायाधीश रुड़की रमेश सिंह ने इस मामले में पांच को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पांचों पर संयुक्त रूप से 15 लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। घटना 24 जून 2022 की रुड़की क्षेत्र की है। शासकीय अधिवक्ता इंद्रपाल बेदी और विवेक कुश ने बताया कि भीख मांग कर गुजारा करने वाली महिला अपनी छह वर्षीय बेटी के साथ कलियर से रुड़की जा रही थी। तभी वहां इमलीखेड़ा कलियर निवासी महक सिंह उर्फ सोनू अपने चार दोस्तों ग्राम बहलना, भोपा मुजफ्फरनगर निवासी राजीव उर्फ विक्की, सुबोध कुमार, साल्हापुर, देवबंद जिला सहारनपुर निवासी सोनू तेजियान व जगदीश के साथ वहां अपनी गाड़ी लेकर आया। उन्होंने महिला को 100 रुपये दिए और गाड़ी में बैठा लिया। इसके बाद महक सिंह ने बच्ची के साथ गन्ने के खेत में दुष्कर्म किया और मेन रोड पर दोनों को उतारकर भाग गए। अगले दिन पांचों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा। बालिका का रुड़की के सरकारी अस्पताल इलाज चला। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद उम्रकैद की सजा सुनाई।
इधर स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर एमबीबीएस सीट हासिल करने के मामले में अब पुलिस की जांच का फोकस ऑनलाइन किए गए आवेदन की प्रकिया पर रहेगा, जिससे पता चलेगा कि आवेदन से लेकर स्वीकृति तक प्रपत्र किन-किन स्तर से पास किए गए। काउंसलिंग की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के कारण अभ्यर्थियों के आवेदन से लेकर प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज अपलोड करने तक का रिकार्ड मौजूद है। मामले में चार अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे का लाभ लेने के लिए प्रमाण पत्र लगाए थे। सत्यापन के दौरान प्रमाण पत्रों में दर्ज पते गलत पाए गए। संबंधित रिकार्ड में जिस स्वतंत्रता सेनानी के नाम का प्रमाण पत्र लगाया गया, उसका नाम भी सरकारी अभिलेख में नहीं मिला।