उत्तराखंड में 'भूकंप' की दहशत: 11 दिनों में 10 बार डोली धरती, बागेश्वर-पिथौरागढ़ और पौड़ी में सबसे ज्यादा हलचल
देवभूमि उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से पाताल में मची हलचल ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के इस महीने में अब तक 10 बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। राहत की बात यह है कि इन झटकों की तीव्रता कम रही, जिससे जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे 'हिमालयी हलचल' का हिस्सा बताते हुए प्रदेशवासियों को सजग रहने की सलाह दी है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, भूकंप का सबसे ज्यादा असर बागेश्वर, पिथौरागढ़ और पौड़ी गढ़वाल जिलों में देखने को मिला है। हलचल की शुरुआत 11 अप्रैल को पौड़ी से हुई, जहाँ रिक्टर स्केल पर 3.3 और 3.6 तीव्रता के दो झटके महसूस किए गए। इसके बाद पहाड़ों में कंपकंपी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भूकंप के लिहाज से सबसे अधिक हलचल बागेश्वर जिले में दर्ज की गई। 19 अप्रैल को सुबह 10:32 से 11:31 के बीच, यानी मात्र एक घंटे के भीतर धरती तीन बार कांपी। इनकी तीव्रता क्रमशः 2.8, 2.6 और 3.1 मापी गई। इसके बाद 20 और 21 अप्रैल को भी बागेश्वर और पौड़ी में लगातार हलचल जारी रही। वहीं, पिथौरागढ़ में भी 14 और 16 अप्रैल को जमीन के भीतर प्लेटों के खिसकने से लोगों में दहशत फैल गई। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत का कहना है कि उत्तराखंड भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील जोन में आता है। उन्होंने बताया, "इस तरह के छोटे भूकंप हिमालयी क्षेत्र में आते रहते हैं। फिलहाल इनमें कोई विशेष पैटर्न नजर नहीं आ रहा है, लेकिन सजगता अनिवार्य है।" संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. नरेश के अनुसार, पूर्व में भी इस तरह के छोटे झटके दर्ज किए गए हैं, जो ऊर्जा की निकासी का माध्यम हो सकते हैं। उत्तराखंड भूकंप के जोन-4 और जोन-5 में आता है, जो अत्यधिक संवेदनशील है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन छोटे झटकों को नजरअंदाज करने के बजाय आपदा प्रबंधन की तैयारियों को पुख्ता करना चाहिए। प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि भूकंप के झटके महसूस होने पर घबराएं नहीं, बल्कि खुले मैदान की ओर जाएं और निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों का पालन करें।