उत्तराखंड सरकार के दावे! डिलीवरी, किच्छा सामुदायिक केंद्र और विधायक शुक्ला? तो क्या एनजीओ ने बचाई जच्चा-बच्चा की जान
रुद्रपुर। उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर होने का दावा करने वाली सरकारों को आज एक आईना दिखाने वाला मामला सामने आया है।
दरअसल, बीते रोज शहर के मोदी मैदान में रहने वाली एक महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उसे किच्छा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। यहां अस्पताल कर्मियों ने यह कहकर प्रसव पीड़ा से करहा रही महिला को लौटा दिया कि अस्पताल में महिला डॉक्टर मौजूद नही है। चूंकी महिला प्रसव पीड़ा में थी तो परिजन उसे आनन-फानन में वहां से वापस ले आये और कमरे पर आकर डिलीवरी कराने को मजबूर हो गए। तभी मामले कि सूचना सरबती देवी मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्षा डॉ रेनू सरन और पदाधिकारियों को लगी तो ट्रस्ट के पदाधिकारी मौके पर पहुंच गए और किच्छा विधायक राजेश शुक्ला को मामले से अवगत कराया। बाद में महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। उधर इस मामले को लेकर विधायक शुक्ला ने स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों से नाराजगी व्यक्त की है। लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का दावा करने वाली सरकारों के दावे सिर्फ हवा हवाई हैं। अगर ये मामला सुर्खियों में नही आता तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। फिलहाल मामले को लेकर जिले की स्वास्थ्य व्यस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।


