Oct 13, 2026 Login
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राजस्थान में सनसनीखेज वारदात: पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या के बाद भोंडा गांव से पलायन,10 गिरफ्तार और 31 नामजद

Sensational incident in Rajasthan: Exodus from Bhonda village following the murder of former MLA Atar Singh Bhadana,10 arrested and 31 named as accused.

जयपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भोंडा गांव में पूर्व भाजपा विधायक अतर सिंह भड़ाना की नृशंस हत्या के बाद इलाके में भारी तनाव और दहशत का माहौल है। इस सनसनीखेज घटना के बाद से गांव में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई ग्रामीणों के गांव छोड़कर पलायन करने की सूचना मिल रही है। पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 10 लोगों को हिरासत में ले लिया है, जबकि मुख्य प्राथमिकी में 31 लोगों को नामजद किया गया है।

राजस्थान के भरतपुर जिले के भोंडा गांव में पूर्व भाजपा विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या के बाद तनाव का माहौल है। खनन स्थल पर हुए कथित हमले में गंभीर रूप से घायल भड़ाना की जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया है। मामले में दर्ज प्राथमिकी में 31 लोगों को नामजद किया गया है। पुलिस की दबिश के बीच कुछ ग्रामीणों के गांव छोड़कर जाने की भी सूचना सामने आई है। हालांकि, गांव से पलायन की खबरों और घटना में शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। जानकारी के अनुसार, भोंडा गांव की पहाड़ियों के पास खनन पट्टे और क्रशर संयंत्र को लेकर करीब दो वर्षों से विवाद चल रहा था। भोंडा और पड़ोसी रायपुर गांव के ग्रामीण खनन गतिविधियों का विरोध कर रहे थे। ग्रामीणों का आरोप था कि खनन से जुड़े वाहनों की आवाजाही के लिए ग्राम पंचायत की चरागाह भूमि का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस मुद्दे पर ग्रामीण कई बार धरना दे चुके थे और खनन स्थल तक जाने वाले रास्ते को भी रोक चुके थे। विरोध के कारण क्रशर संयंत्र बंद पड़ा था। पुलिस के अनुसार, अदालत से क्रशर संयंत्र चलाने की अनुमति मिलने के बाद रविवार को अतर सिंह भड़ाना ने वहां दोबारा काम शुरू कराया था। इसी दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण खनन स्थल पर जुट गए और विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इसी दौरान भड़ाना पर हमला किया गया। उन्हें गंभीर हालत में पहले वैर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल रेफर कर दिया गया। रविवार देर रात उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। भड़ाना की पत्नी कमलेश भड़ाना की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, कुछ लोग कथित तौर पर जबरन खनन स्थल में घुसे और उनके पति पर लाठियों से हमला किया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हमले के दौरान भड़ाना बेहोश हो गए और उन्हें बचाने पहुंचे लोगों के साथ भी मारपीट की गई। प्राथमिकी में 31 लोगों को नामजद करने के साथ 70 से 80 अन्य लोगों के शामिल होने का भी आरोप लगाया गया है। खनन पट्टा कमलेश भड़ाना के नाम पर दर्ज बताया गया है। इस घटना में भड़ाना के सुरक्षाकर्मी गगन शर्मा भी घायल हुए। उन्हें उपचार के लिए भरतपुर के राज बहादुर मेमोरियल अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद पूर्व विधायक का शव परिजनों को सौंप दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, हमले की परिस्थितियों और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का पता लगाने के लिए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पूर्व विधायक की हत्या के बाद राजस्थान में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल ने घटना पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि भड़ाना ने जान का खतरा बताते हुए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से सुरक्षा मांगी थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर घटना को सुरक्षा व्यवस्था की नाकामी बताते हुए पूछा कि जब पूर्व विधायक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा। अतर सिंह भड़ाना हरियाणा के रहने वाले थे और वर्ष 2003 से 2008 तक राजस्थान की बयाना विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रहे थे। उनकी हत्या के मामले में अब पुलिस के सामने आरोपियों की गिरफ्तारी, हमले की पूरी कड़ी उजागर करने और गांव में शांति बहाल करने की चुनौती है। खनन विवाद से शुरू हुआ यह मामला अब हत्या की जांच, ग्रामीणों के आरोपों और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवालों के केंद्र में आ गया है।