चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ‘इंडिया’ गठबंधन! राहुल, खरगे और अखिलेश समेत 11 बड़े नेताओं ने दाखिल की याचिका,एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली। देश में चुनावी निष्पक्षता और मतदाता सूची को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक जंग अब देश की सबसे बड़ी अदालत के चौखट तक पहुंच गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और 'इंडिया' गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने 'विशेष गहन पुनरीक्षण' प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर देश की राजनीति में जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के 11 नेताओं ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी आपत्ति जताई है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है। एसआईआर को लेकर विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच जारी टकराव अब कानूनी प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने से मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता और प्रक्रिया की वैधानिकता पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक कार्यवाही के आधार पर ही स्पष्ट होगा। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं के नाम शामिल बताए गए हैं। इनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव शामिल हैं। इसके अलावा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संजय राउत, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एम. ए. बेबी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई. टी. मोहम्मद बशीर के नाम भी याचिका में बताए गए हैं। याचिका में भारत निर्वाचन आयोग के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के नाम पर ऐसी प्रक्रिया नहीं अपनाई जानी चाहिए, जिससे पात्र मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने का खतरा पैदा हो। एसआईआर को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं, इस विवाद के बीच निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया, उसके नियमों और मतदाता सूची में सुधार के उद्देश्य को लेकर बहस तेज है। किसी भी पक्ष के आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों, तथ्यों और न्यायिक समीक्षा का महत्व बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था। वे मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने यह कहते हुए मुलाकात से इनकार कर दिया कि संबंधित मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। बताया गया कि उन्होंने नेताओं को प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन देने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अपनी बात रखने की सलाह दी। इसके बाद विपक्षी नेताओं की ओर से याचिका दाखिल किए जाने का मामला सामने आया। एसआईआर को लेकर उठे विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। याचिका में लगाए गए आरोपों, निर्वाचन आयोग के पक्ष और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। मतदाता सूची किसी भी चुनाव की बुनियादी व्यवस्था है। इसलिए पात्र मतदाताओं के नाम शामिल रहना, गलत प्रविष्टियों को दुरुस्त करना और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। अब देखना होगा कि याचिका पर अदालत में आगे क्या कार्यवाही होती है और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर उठाए गए सवालों पर क्या कानूनी स्थिति सामने आती है।