मिशन पंजाब' के लिए भाजपा का 'बंगाल फॉर्मूला': नशा और राष्ट्रीय सुरक्षा बनेंगे ढाल, जून में तैनात होंगे सेनापति,अमित शाह खुद संभालेंगे कमान
दिल्ली। पश्चिम बंगाल के दुर्ग में सेंध लगाने वाली अपनी सफल रणनीति से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब पंजाब फतह करने के लिए 'आर-पार' के मूड में है। पार्टी ने पंजाब को भगवामय करने के लिए वही ब्लूप्रिंट तैयार किया है, जिसने बंगाल में उसे मुख्य विपक्षी दल बनाया था। इस मिशन के तहत जून के अंत तक राज्य की सभी विधानसभा सीटों और तीनों प्रमुख क्षेत्रों माझा, दोआबा और मालवाके लिए प्रभारियों की नियुक्ति कर दी जाएगी।
भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि पंजाब और बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियां काफी हद तक समान हैं। दोनों ही संवेदनशील सीमावर्ती राज्य हैं। जहाँ बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मुद्दा था, वहीं पंजाब में पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हो रही ड्रग्स (नशे) की आपूर्ति को भाजपा बड़ा हथियार बनाने जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आम आदमी पार्टी (आप) जिस 'नशा मुक्त पंजाब' के वादे पर सत्ता में आई थी, उसमें वह विफल रही है। भाजपा इसी विफलता को भुनाने के लिए पूरे राज्य में 'नशा विरोधी परिवर्तन यात्रा' निकालने की योजना बना रही है। गृह मंत्री अमित शाह इसी महीने से खुद राज्य के दौरे शुरू कर संगठन की नब्ज टटोलेंगे। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा का खाता भले न खुला हो, लेकिन 18.56% वोट शेयर ने पार्टी में नई जान फूंक दी है। यह आंकड़ा कांग्रेस और आप से केवल 8% कम है। अब पार्टी सिद्धू परिवार और हरभजन सिंह जैसे प्रभावशाली सिख चेहरों के जरिए जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। पार्टी का मानना है कि सुनील जाखड़, कैप्टन अमरिंदर सिंह और रवनीत बिट्टू जैसे दिग्गजों के साथ अब एक मजबूत सिख नेतृत्व तैयार है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ गठबंधन को लेकर भाजपा का रुख अब पहले जैसा नहीं रहा। शिअद से अधिक मत प्रतिशत हासिल करने के बाद भाजपा अब अपनी शर्तों पर बात करना चाहती है। राज्य इकाई के वरिष्ठ नेताओं का संकेत है कि यदि शिअद कम से कम बराबर सीटों पर लड़ने को तैयार होता है, तभी भविष्य में गठबंधन के द्वार खुलेंगे। फिलहाल, भाजपा 'एकला चलो' की नीति पर चलते हुए अपना संगठन मजबूत कर रही है। मान सरकार के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। कई मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं और केंद्रीय एजेंसियां सक्रिय हो चुकी हैं। भाजपा का मानना है कि राज्यसभा सदस्यों का आप छोड़ना और हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान के भाई का भाजपा में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि 'आप' के भीतर बिखराव शुरू हो चुका है। भाजपा इसी 'परसेप्शन वॉर' (धारणा की जंग) को तेज कर मतदाताओं को यह संदेश देना चाहती है कि पंजाब के भविष्य और सुरक्षा के लिए अब केवल 'कमल' ही एकमात्र विकल्प है। जून का महीना पंजाब की राजनीति में भाजपा के इस नए और आक्रामक अवतार की शुरुआत का गवाह बनेगा।