बड़ी खबरः ममता बनर्जी के भतीजे पर हमला! प्रदर्शनकारियों ने फेंके अंडे, हेलमेट पहनकर बचाई जान
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद की राजनीतिक गर्माहट एक बार फिर सड़क पर दिखाई दी जब दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी को विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। शनिवार शाम को कमराबाद इलाके में पहुंचे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की, उन पर कच्चे अंडे फेंके और धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। हालात बिगड़ते देख सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल मोर्चा संभाला और उन्हें सुरक्षा घेरे में लेकर वहां से बाहर निकाला। घटना ऐसे समय सामने आई है जब राज्य में चुनाव बाद हिंसा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। इस घटना ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव को बढ़ा दिया है और सत्तारूढ़ टीएमसी तथा विपक्षी भाजपा के बीच आरोपों का नया दौर शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी शनिवार शाम लगभग साढ़े चार बजे सोनारपुर के कमराबाद इलाके में अपनी पार्टी के एक मृतक कार्यकर्ता के परिजनों से मिलने पहुंचे थे। उनके दौरे की सूचना पहले से ही इलाके में फैल चुकी थी, जिसके चलते बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और विरोध प्रदर्शन कर रहे भाजपा समर्थक वहां एकत्र हो गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। उनके हाथों में कच्चे अंडे थे और वे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नारेबाजी कर रही थीं। जैसे ही उनका काफिला इलाके में पहुंचा, विरोध और तेज हो गया। स्थिति को देखते हुए अभिषेक बनर्जी ने अपना वाहन कुछ दूरी पर छोड़ दिया और बाइक के माध्यम से अंदर जाने की कोशिश की। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें पीड़ित परिवार के घर तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया। इस दौरान उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और "चोर-चोर" जैसे नारे लगाए गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ प्रदर्शनकारी काफी आक्रोशित थे। विरोध के दौरान सड़क पर दो मोटरसाइकिलें फेंक दी गईं, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा बलों को हालात नियंत्रित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा। विरोध प्रदर्शन उग्र होता देख सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत अभिषेक बनर्जी को सुरक्षा कवच प्रदान किया। उन्हें हेलमेट पहनाया गया और चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। घटना के दौरान किसी गंभीर शारीरिक चोट की सूचना नहीं मिली, लेकिन पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। यह घटना पश्चिम बंगाल में बढ़ते राजनीतिक तनाव का नया उदाहरण मानी जा रही है। चुनावी प्रक्रिया के बाद भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं। फिलहाल इस घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक असर पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।