दिल्ली के मुकुंदपुर में सिलेंडर ब्लास्ट से ढहा मकान,मलबे में मची चीख-पुकार,तीन को निकाला बाहर,रेस्क्यू जारी
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर बड़ा रिहायशी हादसा सामने आया है, जिसने अवैध गतिविधियों और सुरक्षा इंतजामों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। साकेत में हुई घटना के बाद, एक सप्ताह के भीतर इमारत गिरने का यह दूसरा मामला है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुकुंदपुर इलाके में मंगलवार सुबह एक मकान में एलपीजी सिलेंडर फटने से जोरदार विस्फोट हुआ, जिसके बाद एक मंजिला मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस भीषण धमाके के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल पैदा हो गया।
हादसे की भयावहता को देखते हुए सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। 250 वर्ग गज के क्षेत्र में फैले मकान के मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। शुरुआती रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से तीन लोगों को सुरक्षित निकालकर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। वहीं, एक अन्य व्यक्ति के अभी भी मलबे के नीचे दबे होने की आशंका के चलते सर्च ऑपरेशन लगातार चलाया जा रहा है। दिल्ली फायर सर्विस के मुख्य अग्निशमन अधिकारी एके मलिक ने घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार सुबह करीब 9:37 बजे जहांगीरपुरी फायर स्टेशन को मुकुंदपुर-द्वितीय स्थित ईशु विहार, गली नंबर-1 में मकान गिरने की सूचना मिली थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दमकल विभाग ने बिना वक्त गंवाए एक वाटर टेंडर, दो वाटर बाउजर, एक क्विक रिस्पांस व्हीकल और एक इंसिडेंट रिस्पांस टीम को घटना स्थल के लिए रवाना कर दिया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान एडीओ पारस, स्टेशन ऑफिसर प्रदीप और स्टेशन ऑफिसर गिरिराज ने संभाली। सुबह करीब 10:10 बजे टीम ने पुष्टि की कि एलपीजी सिलेंडर में हुए भयंकर विस्फोट के कारण पूरा मकान जमींदोज हो चुका है। मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों तक जल्द पहुंचने के लिए जेसीबी (JCB) और अन्य आधुनिक कटर उपकरणों की मदद ली जा रही है। इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नेता संजीव झा ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और आरोप लगाया कि इस रिहायशी इलाके में काफी लंबे समय से अवैध तरीके से कमर्शियल गैस सिलेंडर रिफिलिंग (भरने) का काला कारोबार चल रहा था, जिसकी शिकायतें कई बार की गई थीं लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मौके पर मौजूद चश्मदीदों और स्थानीय निवासियों ने बताया कि धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की धरती हिल गई। लोगों का दावा है कि गिरे हुए मकान के मलबे के नीचे अब भी 50 से ज्यादा एलपीजी सिलेंडर साफ दिखाई दे रहे हैं, जिससे एक बड़े अवैध गोदाम के संचालन की पुष्टि होती है। दिल्ली पुलिस ने पूरे घटना स्थल को सील कर दिया है और सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक मलबे के एक-एक हिस्से की जांच नहीं हो जाती, सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा। फिलहाल हादसे के वास्तविक तकनीकी कारणों की जांच की जा रही है।