भारत में पॉलीमर नोटों की तैयारी में RBI, क्या बदलने जा रही है नोटों की तस्वीर?अडानी ग्रुप के पॉलिमर प्लांट पर भी सोशल मीडिया में छिड़ी बहस

RBI Prepares for Polymer Banknotes: Is the Face of Indian Currency Set to Change? A Debate Erupts on Social Media Over the Adani Group.

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) देश में प्रचलित कागजी मुद्रा के विकल्प के रूप में पॉलीमर बैंक नोटों को अपनाने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो नोट बंदी का दौर एक बार फिर जनता को झेलना पड़ेगा,क्योंकि नई करेंसी आने पर पुरानी करेंसी बाजार से हटने लगेगी।

दरअसल नोटों की छपाई पर लगातार बढ़ते खर्च, उनकी सीमित उम्र और जाली नोटों की चुनौती को देखते हुए केंद्रीय बैंक जल्द ही छोटे मूल्यवर्ग के नोटों पर पॉलीमर तकनीक का परीक्षण शुरू कर सकता है। शुरुआती चरण में 10 और 20 रुपये के नोटों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत शामिल किए जाने की चर्चा है। दुनिया के करीब 60 देशों में पहले से ही पॉलीमर आधारित मुद्रा का उपयोग किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार RBI की हालिया बोर्ड बैठकों में भी इस विषय पर चर्चा हुई है। यदि परीक्षण सफल रहता है, तो भविष्य में 100, 200 और 500 रुपये के नोट भी कागज की बजाय पॉलीमर सामग्री पर छापे जा सकते हैं। केंद्रीय बैंक का मानना है कि यह तकनीक नोटों की उम्र बढ़ाने के साथ-साथ नकली मुद्रा पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद कर सकती है।

दरअसल, भारत में हर वर्ष बड़ी संख्या में नोट फटने, गंदे होने और क्षतिग्रस्त होने के कारण चलन से बाहर हो जाते हैं। RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 23.8 अरब पुराने और खराब हो चुके नोटों को नष्ट करना पड़ा, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 12 प्रतिशत अधिक है। इनमें 100 और 500 रुपये के नोट सबसे अधिक संख्या में शामिल रहे।

नोटों की बढ़ती मांग का असर छपाई लागत पर भी दिखाई दे रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में मुद्रा छपाई पर RBI का खर्च बढ़कर लगभग 6,373 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि एक वर्ष पहले यह आंकड़ा 5,101 करोड़ रुपये था। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाले पॉलीमर नोट केंद्रीय बैंक के लिए लागत कम करने का एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकते हैं।

पॉलीमर नोट विशेष प्रकार की प्लास्टिक आधारित सामग्री से तैयार किए जाते हैं। ये पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ माने जाते हैं। पानी, नमी, धूल-मिट्टी और लगातार इस्तेमाल का इन पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार पॉलीमर नोट सामान्य नोटों की तुलना में दो से ढाई गुना अधिक समय तक चल सकते हैं, जिससे बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता भी कम हो जाती है।

हालांकि भारत में पॉलीमर नोटों का विचार नया नहीं है। वर्ष 2012 में तत्कालीन सरकार ने कुछ चुनिंदा शहरों में 10 रुपये के पॉलीमर नोटों का परीक्षण करने की योजना बनाई थी, लेकिन तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियों के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब तकनीकी प्रगति और बढ़ती मुद्रा लागत को देखते हुए RBI इस दिशा में फिर से पहल करने की तैयारी कर रहा है।

 

 

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक नई चर्चा ने भी जोर पकड़ लिया है। कुछ यूजर्स यह दावा कर रहे हैं कि यदि भारत पॉलीमर नोटों की ओर बढ़ता है तो इसका सबसे बड़ा लाभ अडाणी समूह को मिल सकता है, क्योंकि समूह गुजरात के मुंद्रा में पेट्रोकेमिकल और पॉलीमर क्षेत्र में बड़े निवेश कर रहा है। इस विषय पर कई लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाए, जिनका जवाब एआई चैटबॉट ग्रोक ने भी दिया।

 

ग्रोक के अनुसार पॉलीमर नोटों का सबसे बड़ा लाभ आम जनता और केंद्रीय बैंक को मिलेगा, क्योंकि ये अधिक समय तक चलते हैं, आसानी से खराब नहीं होते और लंबे समय में मुद्रा छपाई का खर्च कम कर सकते हैं। साथ ही उसने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है जिससे यह साबित हो कि किसी निजी कंपनी को पॉलीमर नोटों की योजना से विशेष लाभ मिलने वाला है। बैंक नोटों की छपाई और उनसे जुड़ी सामग्री की खरीद से संबंधित निर्णय मुख्य रूप से सरकारी संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि गुजरात के मुंद्रा में अडाणी समूह द्वारा स्थापित पेट्रोकेमिकल परियोजना मुख्य रूप से PVC उत्पादन पर केंद्रित है, जिसका उपयोग पाइप, केबल, निर्माण सामग्री और अन्य औद्योगिक उत्पादों में होता है। वहीं बैंक नोटों में इस्तेमाल होने वाली पॉलीमर सामग्री तकनीकी रूप से अलग श्रेणी की होती है। ऐसे में फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रस्तावित पॉलीमर मुद्रा व्यवस्था से किसी विशेष निजी समूह को प्रत्यक्ष लाभ मिलने वाला है।

फिलहाल RBI की प्राथमिकता मुद्रा प्रणाली को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और लागत प्रभावी बनाना है। यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय नागरिकों के हाथों में कागजी नोटों की जगह अधिक मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले पॉलीमर नोट दिखाई दे सकते हैं।