Aug 19, 2026 Login

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने की मुख्यमंत्री धामी से मुलाक़ात! राजनीतिक गलियारों में हो रही है चर्चाएं

Bhakiyu's national spokesperson Rakesh Tikait met Chief Minister Dhami! Discussions are happening in political circles

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने की मुख्यमंत्री धामी से मुलाक़ात! राजनीतिक गलियारों में हो रही है चर्चाएं 


राजनीति में किसी भी गतिविधि को महज गतिविधि मान लेना उचित नहीं रहेगा। यहां हर गतिविधि में एक व्यापक अर्थ निहित होते हैं। इसे आप ऐसे समझिए, मान लीजिए, किसी एक नेता की मुलाकात किसी दूसरे नेता से हो रही है, तो उस स्थिति को महज एक मुलाकात मान लेना उचित नहीं रहेगा, क्योंकि राजनीतिक चश्मे से देखें तो उस मुलाकात में एक  व्यापक अर्थ निहित है, जिसे समझने की होड़ राजनीतिक विश्लेषकों में लगी रहती है। अब इतना सबकुछ पढ़ने के बाद आपके जेहन में कई सवाल उठ रहे होंगे कि ऐसी भूमिका किस मसले से रूबरू कराने के लिए रचाई गई है। आखिर माजरा क्या है । जरा कुछ खुलकर बताएंगे, तो चलिए आगे कि रिपोर्ट में हम आपको सबकुछ विस्तार से बताते हैं।

दरअसल भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख राकेश टिकैत ने आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। हालांकि,  इस मुलाकात को महज एक शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन सियासी विश्लेषकों का कहना है कि इस मुलाकात के पीछे व्यापक अर्थ निहित है, लेकिन मीडिया के समक्ष ना ही मुख्यमंत्री की ओर  से इस संदर्भ में कोई वक्तव्य जारी किया गया और ना ही टिकैत की ओर से। ध्यान दें कि दोनों की बीच यह मुलाकात ऐसे वक्त में हुई है, जब उत्तराखंड में यूसीसी  को लेकर चर्चा जोरों पर है।  हाल ही में यूसीसी का ड्रॉफ्ट  सामने आया है , जिसमें कई प्रावधान किए गए हैं। इन प्रावधानों में  महिलाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। यूसीसी ड्रॉफ्ट में बेटियों की शादी की उम्र बढ़ाए जाने का जिक्र किया गया, जिसका अब दबी जुबां से विरोध शुरू हो गया। उधर किसान नेता राकेश टिकैत के रुख की बात करें तो वो लगातार किसानों के पक्ष में आंदोलनरत हैं। अभी हाल ही में उन्होंने सूरजमुखी के एमएसपी के दाम बढ़ाए जाने की मांग को लेकर किसान के साथ आंदोलन किया। इसी आंदोलन का नतीजा है कि सरकार को किसानों के आगे घुटने टेकने पड़ गए। वहीं अब जिस तरह राकेश टिकैत की सीएम धामी से मुलाकात हुई है। उसे लेकर सियासी चर्चाओं का बाजार गुलाजर हो चुका है।