Sep 20, 2026 Login

इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’: राहुल गांधी ने परीक्षा व्यवस्था, शिक्षा बजट और रोजगार पर उठाए सवाल,बोले-सिस्टम को सवाल पूछने वाले छात्रों से लगता है डर

'Voices of Students' in Indore: Rahul Gandhi raises questions on the examination system, education budget, and employment; says the system fears students who ask questions.

इंदौर। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को इंदौर में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में देश की शिक्षा व्यवस्था, लगातार हो रहे पेपर लीक और युवाओं की बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया। सैकड़ों छात्रों और युवाओं से भरे सभागार में राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है और हर बच्चे को बेहतर शिक्षा तथा रोजगार देना सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है, लेकिन वर्तमान में देश की पूरी शिक्षा प्रणाली को ध्वस्त किया जा रहा है।

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं से सीधा संवाद किया। शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, रोजगार और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दे उनके संबोधन के केंद्र में रहे। राहुल गांधी ने मौजूदा परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार होता है तो उसका सीधा असर लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है। कार्यक्रम के दौरान छात्रों की ओर से भी अपनी समस्याएं रखी गईं। एक छात्र की ओर से कहा गया- “सर, हम सिस्टम से हार गए।‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस की ओर से शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित संवाद कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा है। इंदौर से पहले भी विभिन्न शहरों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इंदौर के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों से उनकी पढ़ाई, परीक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़ी चुनौतियों पर खुलकर बात की। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में शिक्षा पर सरकारी खर्च को लेकर आंकड़े पेश किए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 से पहले शिक्षा पर बजट का 4.6 प्रतिशत खर्च होता था, जो अब घटकर 2.6 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने शिक्षा से जुड़े संसाधनों के निजीकरण और बड़े कारोबारी समूहों को लाभ मिलने का आरोप भी लगाया तथा अडाणी और अंबानी का नाम लिया। ये आंकड़े और आरोप राहुल गांधी के भाषण में किए गए दावे हैं। उन्होंने कहा कि देश में आईआईटी और स्कूल जैसी संस्थाओं के निर्माण की लंबी प्रक्रिया रही है, लेकिन मौजूदा दौर में शिक्षा व्यवस्था की दिशा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि वे शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपने तर्क आंकड़ों और प्रस्तुतियों के आधार पर विद्यार्थियों के सामने रखना चाहते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि छात्र व्यवस्था से सवाल करता है और यही उसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विद्यार्थी राजनीतिक और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े सवाल भी पूछता है। उनके अनुसार, सवाल पूछने, जिज्ञासा रखने और तर्क करने वाला विद्यार्थी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भूमिका निभाता है। इसी संदर्भ में राहुल गांधी ने ‘स्टूडेंट’ और ‘अंधभक्त’ के बीच अंतर बताते हुए कहा कि छात्र सवाल करता है, जिज्ञासु रहता है और दूसरे की बात सुनता है, जबकि उनके शब्दों में ‘अंधभक्त’ सवाल नहीं करता। उन्होंने इस दौरान प्रेम, सम्मान, विनम्रता, निडरता और महिलाओं के सम्मान को भी छात्र की विशेषताओं से जोड़ा। उनके इस बयान को कार्यक्रम में शिक्षा के साथ राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों से जोड़कर देखा गया। प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा में कुछ गलतियां अभ्यर्थियों की भी हो सकती हैं, लेकिन लगातार सामने आने वाली अनियमितताओं से विद्यार्थियों का व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिस्टम में बैठे कुछ लोग पैसे के लिए पेपर लीक करते हैं और इसका नुकसान लाखों छात्रों को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार होगा तो मेहनत और योग्यता के आधार पर चयन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े होंगे। कार्यक्रम में छात्रों की प्रतिक्रिया ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता दी। राहुल गांधी ने छात्रों के भविष्य को परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जोड़ते हुए व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।राहुल गांधी ने कहा कि छात्र देश की नींव हैं और शिक्षा कोई विलासिता नहीं, बल्कि हर विद्यार्थी का अधिकार है। उनके अनुसार, किंडरगार्टन से लेकर स्कूल, कॉलेज और रोजगार तक युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षा को रोजगार से जोड़ते हुए कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ भविष्य के लिए अवसर भी मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी तो युवाओं की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और वे राष्ट्र निर्माण में योगदान दे पाएंगे। इंदौर के इस संवाद में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली के साथ युवाओं की आवाज, सवाल पूछने की स्वतंत्रता, रोजगार तथा संस्थागत पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे। राहुल गांधी ने छात्रों से उनकी समस्याओं और अनुभवों को सामने रखने का आह्वान किया, जबकि विद्यार्थियों ने परीक्षा और रोजगार से जुड़ी अपनी चिंताओं को मंच पर रखा।