Sep 10, 2026 Login

उज्जैन: मशीनें हार गईं, क्रेनें जवाब दे गईं...! चार दिन में चार बार हटाने की कोशिश, फिर भी अपनी जगह अडिग खड़े रहे हनुमानजी! 8 फीट की प्रतिमा के सामने प्रशासन बेबस, अब पुरातत्व विभाग करेगा जांच

Ujjain: Machines failed, cranes gave up...! Four attempts were made over four days to remove it, yet Lord Hanuman remained steadfast in his spot! The administration was left helpless before the 8-foo

उज्जैन। सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई ने आस्था और इतिहास से जुड़ा एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क को चौड़ा करने की योजना के तहत मदनलाल शर्मा मार्ग, नई पैठ स्थित सती गेट के पास बने खड़े हनुमानजी के मंदिर को शिफ्ट करने की तैयारी की गई। बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 170 साल पुराना है और इसका निर्माण 1857 के दौर का माना जाता है। नगर निगम की टीम ने 4-5 सितंबर को मंदिर के ढांचे को हटाने की कार्रवाई शुरू की, लेकिन जब बारी प्रतिमा को स्थानांतरित करने की आई तो प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई। करीब आठ फीट ऊंची हनुमानजी की प्रतिमा को उसके स्थान से हटाने के लिए चार दिनों में चार बार प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। हाइड्रोलिक मशीन के जरिए भी उसे खिसकाने की कोशिश की गई, मगर सफलता नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन ने फिलहाल प्रतिमा को हटाने की कार्रवाई रोक दी है। भक्त इसे हनुमानजी का चमत्कार और दैवीय संकेत मान रहे हैं। वहीं प्रशासनिक स्तर पर इसे प्रतिमा की मजबूत और अज्ञात नींव से जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल सती गेट पर खड़े हनुमानजी की प्रतिमा अपने मूल स्थान पर ही सुरक्षित है। मंदिर का ढांचा हटाए जाने के बाद प्रतिमा को मौसम और अन्य नुकसान से बचाने के लिए कैनोपी टेंट लगाया गया है। मंदिर से जुड़े पुजारियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि हनुमानजी स्वयं अपना स्थान छोड़ना नहीं चाहते। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर श्रद्धालुओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग इसे आस्था का विषय बताते हुए प्रतिमा को हटाने से पहले पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। वहीं हिंदू संगठनों ने प्रशासन से प्रतिमा के साथ किसी भी तरह का जोखिम न लेने की चेतावनी दी है। संगठनों का कहना है कि प्रतिमा को स्थानांतरित करने से पहले उसकी सुरक्षा को लेकर लिखित गारंटी दी जानी चाहिए।

जमीन के नीचे कितनी गहरी है नींव, किसी को नहीं पता
प्रतिमा के नहीं हिलने के पीछे तकनीकी वजह भी सामने आ रही है। प्रशासन को अब अंदाजा हुआ है कि प्रतिमा बेहद मजबूत आधार पर स्थापित हो सकती है। जमीन के ऊपर दिखाई देने वाली प्रतिमा करीब आठ फीट की है, लेकिन उसके नीचे नींव कितनी गहराई तक है, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी नहीं मिल सकी है। बताया जा रहा है कि प्रतिमा संभवतः एक ही बड़े पत्थर को तराशकर बनाई गई है। ऐसे में सीधे खींचकर इसे हटाने की कोशिश करने पर प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने का खतरा हो सकता है। पुजारियों के अनुसार, प्रतिमा के पास करीब डेढ़ फीट तक गड्ढा खोदकर उसकी नींव का पता लगाने की कोशिश की गई, लेकिन इससे भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई। अब प्रशासन और पुरातत्व विभाग की टीम ग्राउंड स्कैनिंग तकनीक का इस्तेमाल करने की तैयारी में है। स्कैनिंग के जरिए जमीन के भीतर प्रतिमा की संरचना और आधार का पता लगाने के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।

170 साल पुरानी या हजार साल से भी ज्यादा पुरानी?
इस पूरे मामले ने प्रतिमा के इतिहास को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। अभी इसे करीब 170 साल पुराना यानी 1857 के आसपास का माना जा रहा है, लेकिन पुरातत्व विशेषज्ञों के स्तर पर इसकी प्राचीनता की जांच शुरू हो गई है। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि प्रतिमा का संबंध परमार वंश और राजा भोज के शासनकाल से हो सकता है। यदि यह दावा पुरातात्विक जांच में सही साबित होता है तो प्रतिमा की उम्र करीब एक हजार वर्ष या उससे अधिक भी हो सकती है। हालांकि फिलहाल यह केवल संभावना है और इसकी पुष्टि विशेषज्ञों की जांच के बाद ही हो सकेगी। विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के मुताबिक, प्रतिमा मालवा क्षेत्र में मिलने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर पर तराशी गई प्रतीत होती है। उनके अनुसार परमार वंश और राजा भोज के समय भी इस तरह के पत्थरों पर कलाकृतियां उकेरने की परंपरा रही है। हालांकि प्रतिमा पर चढ़ी सिंदूर की मोटी परत के कारण उसकी मूल बनावट और भाव-भंगिमा को सीधे तौर पर देख पाना मुश्किल है।

कई पीढ़ियों से मंदिर की सेवा कर रहा पुजारी परिवार
सती गेट स्थित खड़े हनुमानजी के मंदिर से स्थानीय लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित महेश बैरागी का परिवार कई पीढ़ियों से यहां पूजा-अर्चना और सेवा करता आ रहा है। ऐसे में मंदिर के ढांचे को हटाए जाने और प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कोशिश के बाद स्थानीय श्रद्धालुओं में भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि सड़क विकास जरूरी है, लेकिन प्राचीन और आस्था से जुड़े धार्मिक स्थलों के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सोशल मीडिया पर भी लोग प्रतिमा के अपनी जगह से नहीं हिलने को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई श्रद्धालु इसे भगवान की इच्छा से जोड़ रहे हैं, जबकि प्रशासनिक और विशेषज्ञ स्तर पर प्रतिमा की संरचना और नींव की तकनीकी जांच पर जोर दिया जा रहा है। फिलहाल खड़े हनुमानजी की प्रतिमा अपने स्थान पर ही है और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसे सुरक्षित रखना है। सड़क चौड़ीकरण की योजना के बीच अब मामला केवल एक मंदिर को शिफ्ट करने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रतिमा के इतिहास, पुरातात्विक महत्व, संरचना और धार्मिक आस्था से भी जुड़ गया है।