Sep 11, 2026 Login

हैरान करने वाला मामलाः पांचवीं पास शेर सिंह निकला नकली नोटों का मास्टरमाइंड! किराए के कमरे में छाप रहा था करेंसी, 2.04 लाख के नकली नोट बरामद

Shocking case: Sher Singh, who has only studied up to the fifth grade, turned out to be the mastermind behind a counterfeit currency racket! He was printing fake notes in a rented room; counterfeit n

कानपुर। पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाला शख्स प्रिंटर और जरूरी सामान जुटाकर नकली नोट छापने लगा और किराए के एक कमरे को ही नकली करेंसी तैयार करने का ठिकाना बना दिया। इसके बाद इन नोटों को बाजार में खपाने के लिए रेलवे स्टेशन और भीड़भाड़ वाले बाजारों को निशाना बनाया गया। कानपुर पुलिस ने ऐसे ही एक नकली नोट गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से कुल 2 लाख 4 हजार 650 रुपये की नकली करेंसी बरामद हुई है। इनमें 100 रुपये के नकली नोटों की संख्या सबसे अधिक है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में 52 वर्षीय शेर सिंह, 36 वर्षीय सोमिल गुप्ता और 24 वर्षीय रोशन अली शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि शेर सिंह ही इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था और प्रिंटर की मदद से नकली नोट तैयार करता था। खास बात यह है कि नकली नोट तैयार करने का यह पूरा खेल किसी बड़े ठिकाने या कारखाने में नहीं, बल्कि रेल बाजार इलाके में रामलीला मैदान के पास किराए के एक कमरे से संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने जब किराए के कमरे पर छापा मारा तो वहां का पूरा सेटअप देखकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। कमरे में प्रिंटर के साथ नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान मौजूद था। पुलिस के मुताबिक मौके से कैंची, पेपर कटर, तराजू, स्याही के कंटेनर, कागज की शीट, बैग और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने नकली नोट तैयार करने के लिए जरूरी सामान एक ही जगह जुटा रखा था। कमरे को बाहर से सामान्य दिखाने की कोशिश की जाती थी, जबकि अंदर नकली करेंसी तैयार करने का काम चल रहा था। जांच में अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस सेटअप को कब से संचालित किया जा रहा था और इससे पहले कितनी नकली करेंसी तैयार की जा चुकी है। पुलिस कार्रवाई में सबसे ज्यादा संख्या 100 रुपये के नकली नोटों की बरामद हुई। पुलिस के अनुसार कुल 1,991 नकली 100 रुपये के नोट, 50 रुपये के 71 नकली नोट और 500 रुपये के चार नकली नोट बरामद किए गए हैं। बरामद नकली करेंसी की कुल कीमत 2,04,650 रुपये बताई गई है। नकली नोटों में छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की संख्या अधिक होने को पुलिस जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह छोटे मूल्य के नोटों के जरिए बाजार में नकली करेंसी को धीरे-धीरे खपाने की रणनीति अपना रहा था। छोटी रकम के लेन-देन में नकली नोटों को पहचान पाना अपेक्षाकृत मुश्किल होने की आशंका के चलते ऐसे स्थानों को निशाना बनाया गया होगा। पुलिस जांच में नकली नोटों के कारोबार का एक कथित तरीका भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी नकली करेंसी को उसकी रकम के मुकाबले तीन गुना रकम के हिसाब से बदलते थे। यानी नकली नोटों को सीधे किसी बड़े कारोबारी या बैंकिंग चैनल में डालने के बजाय छोटे स्तर पर बाजार में खपाने की कोशिश की जाती थी। पुलिस का मानना है कि यही वजह थी कि गिरोह की नजर छोटी दुकानों और भीड़भाड़ वाले बाजारों पर थी। रेलवे स्टेशन के आसपास चाय, पानी, नाश्ता और छोटी खरीदारी करने वाले लोगों की संख्या लगातार बनी रहती है। ऐसे में छोटे मूल्य के नोटों को अलग-अलग लेन-देन में चलाने की कोशिश की जा सकती थी। हालांकि पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि बरामद करेंसी ही गिरोह का पूरा स्टॉक था या इससे पहले भी बड़ी मात्रा में नकली नोट बाजार में पहुंचाए जा चुके हैं। पुलिस के मुताबिक गिरोह का निशाना सिर्फ एक बाजार तक सीमित नहीं था। आरोपी कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन और आसपास के जिलों के रेलवे स्टेशनों पर नकली नोट चलाने की कोशिश करते थे।

पांचवीं पास शेर सिंह कैसे बना मास्टरमाइंड?

इस पूरे मामले में 52 वर्षीय शेर सिंह पुलिस की जांच के केंद्र में है। पुलिस के अनुसार शेर सिंह ने केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की है, लेकिन वह प्रिंटर और अन्य उपकरणों की मदद से नकली नोट तैयार कर रहा था। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शेर सिंह ने नकली नोट तैयार करने का तरीका कहां से सीखा। क्या उसने यह काम खुद सीखा या उसे किसी दूसरे व्यक्ति ने प्रशिक्षित किया? क्या वह अकेले नकली नोट तैयार करता था या गिरोह में कोई अन्य व्यक्ति तकनीकी काम संभालता था? इन सभी सवालों के जवाब जांच के दौरान तलाशे जा रहे हैं। पुलिस को यह भी शक है कि नकली नोट तैयार करने और उन्हें बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। इसी वजह से गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क की अगली कड़ियां तलाशने की कोशिश की जा रही है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार तीनों आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। सोमिल गुप्ता के खिलाफ पांच मामले, जबकि रोशन अली के खिलाफ सात मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। वहीं कथित मास्टरमाइंड शेर सिंह के खिलाफ चार मामले दर्ज बताए गए हैं। अब पुलिस इन पुराने मामलों और आरोपियों के आपसी संपर्कों की भी जांच कर रही है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या तीनों पहले से किसी संगठित आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा थे और क्या पुराने संपर्कों का इस्तेमाल नकली करेंसी के कारोबार में किया गया।

छापे में मिला नकली नोटों का पूरा सेटअप
रेल बाजार पुलिस की कार्रवाई में केवल तैयार नकली नोट ही नहीं मिले, बल्कि नोट तैयार करने से जुड़ा पूरा सामान भी बरामद किया गया। पुलिस के मुताबिक मौके से प्रिंटर, कैंची, पेपर कटर, तराजू, स्याही के कंटेनर, कागज की शीट, बैग और अन्य उपकरण मिले हैं। इन सामानों की बरामदगी जांच में इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इनके जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह का कामकाज किस तरह संचालित होता था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली कागज, स्याही और अन्य सामग्री कहां से खरीदी जाती थी। इस पूरे मामले में पुलिस के सामने अब कई अहम सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 2.04 लाख रुपये की बरामद नकली करेंसी ही गिरोह का पूरा स्टॉक था या इससे पहले भी बड़ी मात्रा में नकली नोट बाजार में उतारे जा चुके हैं? दूसरा सवाल यह है कि नकली नोट तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाली कागज, स्याही और अन्य सामग्री कहां से लाई जाती थी। पुलिस इन सामानों के सप्लायरों तक पहुंचने की कोशिश कर सकती है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि रेलवे स्टेशन और आसपास के बाजारों में नकली नोट खपाने वाले नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। अगर गिरोह का नेटवर्क कानपुर से बाहर तक फैला है तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।