फरियादः पीएम मोदी से मिलने पहुंचे स्कूल के दोस्त! असगरअली वोहरा ने उठाया 40 साल पुराने जमीन विवाद का मुद्दा, की CBI जांच की मांग! BJP विधायक की कंपनियों पर लगाए गंभीर आरोप
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्कूल के पुराने साथी असगरअली वोहरा ने अपने करीब चार दशक पुराने जमीन विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर मामले में CBI से जांच कराने की मांग की है। वोहरा ने 8 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर उन्हें अपनी शिकायत से संबंधित एक पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने अपनी जमीन के कथित तौर पर विवादित तरीके से दस्तावेज तैयार किए जाने और उस पर कब्जे से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर से लेकर राजनीतिक हलकों तक चर्चा तेज हो गई है। असगरअली वोहरा की पहचान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने स्कूल साथी के तौर पर बताई गई है। उन्होंने गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में प्रधानमंत्री मोदी के साथ पढ़ाई की थी। वोहरा का कहना है कि वह पिछले करीब 40 वर्षों से अपनी जमीन के अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। अब उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी समस्या रखते हुए पूरे मामले की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। शिकायत के मुताबिक, असगरअली वोहरा ने वर्ष 1989 में एक रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के जरिए करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। यह जमीन पुराने सर्वे नंबर 240, नए सर्वे नंबर 185, हिस्सा नंबर 6 में नवघर रोड, भायंदर पूर्व क्षेत्र में स्थित बताई गई है। वोहरा का दावा है कि उन्होंने इस जमीन को न तो कभी बेचा और न ही किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के नाम ट्रांसफर किया। शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके बावजूद बाद के वर्षों में जमीन के दस्तावेजों और स्वामित्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया। वोहरा ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2011 के आसपास कथित तौर पर ‘स्वयं बिल्डर्स’ की मिलीभगत से जमीन से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। उन्होंने पूरे मामले में संबंधित कंपनियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है।
जमीन को दो हिस्सों में बांटने का आरोप
वोहरा द्वारा प्रधानमंत्री को सौंपे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि वास्तविक मालिक की जानकारी के बिना जमीन को दो हिस्सों में बांट दिया गया। शिकायत के मुताबिक, जमीन के एक हिस्से पर ‘स्वयं बिल्डर्स’ का कब्जा दिखाया गया, जबकि दूसरे हिस्से पर ‘सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स’ का कब्जा दर्शाया गया। वोहरा ने इन दोनों कंपनियों के कथित कामकाज को लेकर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित कंपनियों या व्यक्तियों का पक्ष इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही हो सकेगी। शिकायतकर्ता के अनुसार, जमीन से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेजों के मामले में वर्ष 2015 में FIR भी दर्ज की गई थी। वोहरा का आरोप है कि मामले की CID रिपोर्ट करीब 11 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद वर्ष 2026 में उन्हें प्राप्त हुई। उनका कहना है कि इतने लंबे समय तक मामले के लंबित रहने के कारण उन्हें अपनी जमीन के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा। अब वोहरा ने प्रधानमंत्री से पूरे मामले की CBI से जांच कराने और जमीन से जुड़े दस्तावेजों, कथित फर्जीवाड़े तथा संबंधित कंपनियों की भूमिका की निष्पक्ष तरीके से जांच कराने की मांग की है।
PM से मुलाकात के बाद नगर निगम हरकत में
बताया गया है कि 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से असगरअली वोहरा की मुलाकात और शिकायत सौंपे जाने के बाद स्थानीय नगर निगम अधिकारियों ने भी मामले पर ध्यान दिया है। अब इस जमीन विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई 16 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है। सुनवाई के दौरान संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आगामी सुनवाई में जमीन के दस्तावेजों, कब्जे से जुड़े दावों और संबंधित कंपनियों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। करीब चार दशक से जमीन के अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहे असगरअली वोहरा की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद यह पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वोहरा ने मामले में CBI जांच की मांग करते हुए कथित दस्तावेजी गड़बड़ियों और जमीन पर कब्जे के आरोपों की विस्तृत जांच की मांग की है। अब सबकी नजर 16 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर है।