Sep 17, 2026 Login

‘चंदा मामा दूर के’ कविता में एक शब्द ने मचाया बवाल! बच्चों की किताब में आपत्तिजनक शब्द को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा मामला, केंद्र से मांगा जवाब

A single word in the poem ‘Chanda Mama Door Ke’ sparks an uproar! Matter reaches the High Court over an objectionable word in a children's book; response sought from the Centre.

पटना। एनसीईआरटी की कक्षा-1 की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘सारंगी भाग-01’ में प्रकाशित देश की प्रसिद्ध बाल कविता ‘चंदा मामा दूर के’ की एक पंक्ति में कथित तौर पर गलत और आपत्तिजनक शब्द के मुद्रण का मामला पटना हाईकोर्ट पहुंच गया है। पाठ्यपुस्तक में छपी इस कथित प्रिंटिंग त्रुटि को लेकर दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले में अब तक उठाए गए सुधारात्मक कदमों की जानकारी भी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी। मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायाधीश सुधीर सिंह की खंडपीठ ने पटना के मुसल्लहपुर निवासी सौमित्र शंकर की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शोवेन्द्र कुमार ने अदालत को बताया कि एनसीईआरटी की हिंदी पुस्तक ‘सारंगी भाग-01’ में शामिल ‘चंदा मामा दूर के’ कविता की दूसरी पंक्ति में एक शब्द गलत तरीके से प्रकाशित हो गया है। याचिका में दावा किया गया कि इस एक शब्द के कारण कविता का मूल अर्थ बदल गया और उसका स्वरूप आपत्तिजनक हो गया है।

 याचिका के अनुसार कविता की संबंधित पंक्ति ‘पूआ पकाएं गुड़ के’ होनी चाहिए थी, लेकिन पुस्तक में ‘गुड़’ के स्थान पर कथित तौर पर एक आपत्तिजनक शब्द छप गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि कक्षा-1 के बच्चों के लिए तैयार की गई पाठ्यपुस्तक में इस तरह की मुद्रण त्रुटि गंभीर विषय है। इससे न केवल कविता का अर्थ बदलता है, बल्कि बच्चों के बीच अनुचित शब्द पहुंचने की आशंका भी रहती है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि पुस्तक में प्रकाशित कथित आपत्तिजनक शब्द महिलाओं की गरिमा और सामाजिक मर्यादा से जुड़ी आपत्तियां पैदा करता है। बच्चों की शुरुआती शिक्षा में पाठ्यपुस्तकों की भाषा और सामग्री को लेकर विशेष सावधानी की जरूरत होती है। ऐसे में याचिकाकर्ता ने अदालत से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। याचिकाकर्ता के अनुसार, ‘सारंगी भाग-01’ पुस्तक वर्ष 2023 में प्रकाशित हुई थी। उनका दावा है कि कथित गलती सामने आने के बावजूद लंबे समय तक इसमें सुधार नहीं किया गया। याचिका में कहा गया कि उन्हें इस गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने 21 जुलाई को कदमकुआं स्थित ज्ञान गंगा बुक डिपो से पुस्तक खरीदकर उसके संबंधित पृष्ठ का सत्यापन किया। इसके बाद मामले को अदालत के समक्ष लाया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि आम अभिभावक या पाठक पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित सामग्री को अपने स्तर पर संशोधित नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने हाईकोर्ट से हस्तक्षेप कर उचित सुधार सुनिश्चित कराने की मांग की है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े केंद्र सरकार और संबंधित विभागों से जवाब मांगा है।